NEET परिणाम विवाद हाईकोर्ट पहुंचा: NTA की वैधता पर सवाल, छात्र ने 241 अंकों के अंतर का लगाया आरोप

नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली सहित देश के अलग-अलग स्थानों पर हो रहे प्रदर्शनों के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की वैधता और कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठ गए हैं। मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। इसे लेकर याचिका दायर हुई है। कहा है कि एनटीए द्वारा जारी अधिकारिक ओएमआर शीट, उत्तर कुंजी और अंतिम परिणाम में गंभीर विसंगतियां हैं।
ओएमआर शीट और उत्तरकुंजी के हिसाब से छात्रों को मिल रहे अंक और अंतिम परिणाम में मिले अंकों में अंतर है। ऐसी स्थिति में एनटीए की कार्यप्रणाली ही संदिग्ध हो गई है। याचिका में एनटीए के गठन, उसके कानूनी दर्जे और संवैधानिक वैधता को भी चुनौती देते हुए कहा है कि एनटीए संसद द्वारा स्थापित वैधानिक संस्था नहीं, बल्कि सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत एक सोसायटी है। प्रवेश परीक्षाओं के संचालन के उसके अधिकार तथा वैधानिक स्थिति की न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।
हाई कोर्ट में यह याचिका झाबुआ जिले के छात्र लोकेंद्रसिंह खड़िया ने एडवोकेट अभिनव धनोडकर के माध्यम से दायर की है। कहा है कि आधिकारिक ओएमआर शीट और उत्तर कुंजी के आधार पर उसके 305 अंक बनते हैं, जबकि अंतिम परिणाम में उन्हें सिर्फ 64 अंक दिए गए। इस तरह से 241 अंक का अंतर आया और इससे उनका मेडिकल प्रवेश प्रभावित हुआ।
याचिका में यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता ने वर्ष 2024 में बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इंदौर में रहकर दो वर्षों तक नीट की तैयारी की। 14 जुलाई को एनटीए द्वारा ओएमआर शीट उपलब्ध कराए जाने पर पहली बार लागिन करने पर भौतिकी और रसायन विज्ञान के सभी उत्तर रिक्त दिखाई दिए। कुछ समय बाद दोबारा लॉगिन करने पर दूसरी ओएमआर शीट उपलब्ध हुई। इसमें उसके उत्तर दर्ज थे।
याचिकाकर्ता का दावा है कि दूसरी ओएमआर शीट का आधिकारिक उत्तर कुंजी से मिलान करने पर भौतिकी में 104, रसायन विज्ञान में 125 तथा जीव विज्ञान में 76 अंक इस तरह से कुल 305 अंक बनते हैं, लेकिन 16 जुलाई 2026 को घोषित परिणाम में उसे सिर्फ 64 अंक मिले। याचिका में इसे ओएमआर डेटा प्रोसेसिंग, मूल्यांकन प्रणाली अथवा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में गंभीर तकनीकी गड़बड़ी बताया है।
याचिकाकर्ता ने ई-मेल के माध्यम से एनटीए को शिकायत भेजी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। याचिका में मांग की है कि एनटीए को ओएमआर शीट, मूल्यांकन प्रक्रिया और अंक गणना का स्वतंत्र सत्यापन करने तथा आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर परिणाम में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए जाएं। याचिकाकर्ता का कहना है कि वे पुनर्मूल्यांकन की मांग नहीं कर रहे बल्कि एनटीए के आधिकारिक रिकॉर्ड में मौजूद विसंगति को दूर करवाना चाहते हैं।