बेलगावी में संघ का शक्ति मंथन, शताब्दी वर्ष, भाजपा और राम मंदिर ट्रस्ट पर रहेगी नजर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक इस बार 10, 11 और 12 जुलाई को कर्नाटक के बेलगावी में आयोजित होने जा रही है। सामान्यतः यह बैठक संघ के नियमित संगठनात्मक कार्यक्रमों का हिस्सा होती है, लेकिन इस बार इसकी अहमियत कई कारणों से अधिक बढ़ गई है।
संघ अपने शताब्दी वर्ष (2025-26) के मध्य चरण में है, देश के अनेक राज्यों में राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, भाजपा का संगठनात्मक पुनर्गठन भी जारी है और अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े हालिया विवादों ने भी नई परिस्थितियां पैदा कर दी हैं। ऐसे समय में बेलगावी की बैठक केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले वर्षों की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण बैठक भी मानी जा रही है।
इस बैठक में संघ के सभी 11 क्षेत्रों और 46 प्रांतों के प्रांत प्रचारक, सह प्रांत प्रचारक, क्षेत्र प्रचारक और सह क्षेत्र प्रचारक भाग लेंगे। इनके साथ संघ प्रेरित 32 विभिन्न संगठनों के अखिल भारतीय संगठन मंत्री भी उपस्थित रहेंगे। संघ की कार्यप्रणाली में प्रांत प्रचारकों का विशेष महत्व होता है, क्योंकि वे शाखा विस्तार, कार्यकर्ता निर्माण और संगठन के दीर्घकालिक विकास की रीढ़ माने जाते हैं।
बैठक में संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत अब तक आयोजित कार्यक्रमों का मूल्यांकन भी किया जाएगा। विजयादशमी 20 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले शताब्दी वर्ष के शेष कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी विस्तार पर भी विचार किया जाएगा।
चंदा चोरी कांड और भाजपा पर भी चर्चा होगी
इस बार बैठक का सबसे चर्चित पहलू संघ के अनुषांगिक संगठनों और समसामयिक घटनाक्रमों से जुड़ा माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित चंदा अनियमितता प्रकरण के बाद उत्पन्न परिस्थितियों पर भी विचार हो सकता है। 6 जुलाई को प्रस्तावित राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के निष्कर्षों के बाद वहां की व्यवस्थाओं को लेकर संघ स्तर पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राम मंदिर केवल एक धार्मिक परियोजना नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और लंबे सामाजिक आंदोलन का प्रतीक है। ऐसे में उसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना सभी संबंधित पक्षों की प्राथमिकता होगी।
राजनीतिक दृष्टि से भी बेलगावी की बैठक पर सबकी निगाहें रहेंगी। यद्यपि संघ और भाजपा अपनी-अपनी स्वतंत्र संगठनात्मक संरचना रखते हैं, फिर भी दोनों के बीच संगठनात्मक समन्वय लंबे समय से स्थापित परंपरा का हिस्सा रहा है। भाजपा इस समय कई राज्यों में अपने संगठन को मजबूत करने की प्रक्रिया में है। जानकारी के अनुसार पार्टी ने संघ से कुछ पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की मांग की है, जिन्हें विभिन्न राज्यों में प्रांतीय संगठन महामंत्री जैसी जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।
वर्तमान में देश के पांच राज्यों में प्रांतीय संगठन महामंत्री का पद रिक्त बताया जा रहा है, जिनमें मध्य प्रदेश भी शामिल है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बेलगावी बैठक के बाद इन पदों पर नियुक्तियों का मार्ग प्रशस्त होता है। यदि ऐसा होता है तो इसका प्रभाव केवल संगठन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों और भाजपा की चुनावी तैयारियों पर भी दिखाई दे सकता है।
स्पष्ट है कि बेलगावी की यह बैठक केवल एक वार्षिक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं है। संघ के शताब्दी वर्ष, भाजपा के संगठनात्मक पुनर्गठन, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े घटनाक्रम और आगामी चुनावी परिदृश्य के बीच यह बैठक कई महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। इसलिए इसके निर्णयों और निष्कर्षों पर केवल स्वयंसेवकों की ही नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों पर नजर रखने वाले सभी वर्गों की निगाहें टिकी रहेंगी।
यह सब बैठक में होंगे शामिल
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले, सभी सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, सी. आर. मुकुंद जी, अरुण कुमार , रामदत्त जी, आलोक कुमार , अतुल लिमए सहित अखिल भारतीय कार्य विभाग प्रमुख एवं कार्यकारिणी के सदस्य बैठक में भाग लेने वाले हैं।