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भोजशाला में हनुमान चालीसा के साथ पूजा-अर्चना, श्रद्धालु बोले- वर्षों बाद बिना रोक-टोक हुए दर्शन

मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के बाद शनिवार सुबह हनुमान चालीसा पाठ और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं और विभिन्न समितियों के पदाधिकारियों ने मां वाग्देवी स्थल और यज्ञ कुंड पर पुष्प अर्पित कर दर्शन किए।

फैसले के बाद धार शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। शनिवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रद्धालु और भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी भोजशाला पहुंचे। इनमें संरक्षक विश्वास पांडे, भोजशाला मुक्ति यज्ञ संयोजक गोपाल शर्मा, श्रीश दुबे, केशव शर्मा और अशोक जैन शामिल रहे। सभी ने शांतिपूर्ण माहौल में पूजा-अर्चना कर हनुमान चालीसा का पाठ किया।

श्रद्धालुओं ने पूजा के बाद कहा कि वर्षों बाद उन्हें बिना किसी रोक-टोक के दर्शन और पूजा करने का अवसर मिला है। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि “भोजशाला का कण-कण यह दर्शाता है कि यह मंदिर है।” उन्होंने मुस्लिम पक्ष द्वारा आगे कानूनी कार्रवाई की संभावना पर कहा कि उन्हें उच्चतम न्यायालय जाने की स्वतंत्रता है, लेकिन भोजशाला “मंदिर था, मंदिर है और मंदिर ही रहेगा।”

गौरतलब है कि Madhya Pradesh High Court की इंदौर खंडपीठ ने शुक्रवार को भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इसे राजा भोज कालीन मां वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर माना और हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया।

फैसले के बाद शनिवार सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे और जयकारों के बीच दर्शन, पूजा-अर्चना और हनुमान चालीसा पाठ किया। प्रशासन ने पूरे धार शहर और भोजशाला परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है।

उच्चतम न्यायालय में दायर हुई कैविएट याचिकाएं

हिंदू पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता Vishnu Shankar Jain ने बताया कि हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के ASI आदेश को आंशिक रूप से निरस्त किया है, जिसमें मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को निर्धारित समय के लिए नमाज की अनुमति दी गई थी।

उन्होंने बताया कि मुस्लिम पक्ष के उच्चतम न्यायालय जाने की संभावना को देखते हुए हिंदू पक्ष की ओर से दो कैविएट याचिकाएं दायर की गई हैं। साथ ही अदालत ने लंदन के संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा वापस लाने की मांग पर भी विचार किया है।

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