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विजयवर्गीय बोले- मौलाना मूर्ख: इंदौर शहर काजी ने कहा- समर्थन नहीं; जर्जिस ने शिव जी को लेकर दिया था विवादित बयान

इंदौर। कैलाश विजयवर्गीय ने मौलाना जर्जिस अंसारी को मूर्ख बताया है। उन्होंने कहा- ऐसे लोग सामाजिक समरसता के ताने-बाने को तोड़ना चाहते हैं। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इधर इंदौर शहर काजी  डॉ. मोहम्मद इशरत अली ने कहा- किसी भी धर्म के खिलाफ बोलने का अधिकार नहीं है। भारत धर्मनिरपेक्ष देश है। ऐसे बयान से समाज का माहौल खराब होता है। हम ऐसे मौलाना को हम नहीं जानते।

गोलू शुक्ला बोले- अपमान बर्दाश्त नहीं
इंदौर-3 से विधायक गोलू शुक्ला ने भी मौलाना के बयान का विरोध किया है। उन्होंने कहा- शिव जी के बारे में कोई भी टिप्पणी बर्दाश्त नहीं करेंगे।



मौलाना के खिलाफ थाने में हो चुका प्रदर्शन

शनिवार को इंदौर के चंदन नगर थाने पर कांवड़ियों ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने मौलाना के खिलाफ FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की थी।

गिरफ्तारी नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन करेंगे
अखिल भारतीय बलाई महासंघ राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज परमार ने कहा कि मौलाना जर्जिस अंसारी ने अपनी तकरीर में हमारे आराध्य भगवान भोलेनाथ (महाकाल) के बारे में बेहद अभद्र और अशोभनीय टिप्पणियां की हैं, जिससे हिंदू समाज और करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इसी के विरोध में महामंडलेश्वर नितिन दास महाराज के सानिध्य में कांवड़ यात्री चंदन नगर थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

पुलिस अधिकारियों ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जिसके बाद हमने कांवड़ यात्रा आगे बढ़ाई। यदि आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी नहीं की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अगले सोमवार को 5 हजार लोगों की कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी और जरूरत पड़ी तो थाने या एसपी कार्यालय का घेराव भी करेंगे।


अब जान लेते हैं पूरा मामला
मौलाना जर्जिस अंसारी ने भगवान शिव, ब्रह्मा और शिवलिंग पूजा को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। भाषण में दावा किया गया था कि ब्रह्मा ने भगवान शिव का खतना किया था। इससे जुड़ी एक कहानी भी सुनाई गई थी।

श्रीकृष्ण को बताया था पांच वक्त का नमाजी
इससे पहले भी मौलाना द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए बयानों पर विवाद खड़ा हो चुका है। मौलाना ने भगवान श्री कृष्ण को पांच वक्त का नमाजी और मुसलमान बताया था। तब देश भर में आक्रोश था। विरोध प्रदर्शन हुए थे। हिंदू संगठनों और संत समाज ने इसे सनातन धर्म और आराध्य देवी-देवताओं का अपमान बताया था।

श्रीमद्भागवत गीता का दिया था संदर्भ
मौलाना ने गीता के छठे अध्याय के श्लोक का अपने तरीके से अर्थ निकालकर बयान दिया था। जिसे धार्मिक विद्वानों और संतों ने पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया था। 

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