विजयवर्गीय बोले- फेल हुए विदेशी ताकतों के मंसूबे: पहले दिन से इस्तीफा देने को तैयार थे प्रधान; बिना भूमिका के जश्न मना रही कांग्रेस

इंदौर। ‘यदि पड़ोसी के घर बच्चा हो जाए और कांग्रेस ढोल बजाए तो उसमें उसकी क्या भूमिका है? छात्र आंदोलन में कांग्रेस की कोई भूमिका नहीं थी, लेकिन वह इसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है’।
शनिवार रात विजयवर्गीय ने इंदौर में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत होटल और उद्योगपतियों से साथ बैठक की। इसके बाद उन्होंने मीडिया से धर्मेंद्र प्रधान की कार्यशैली की सराहना की।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- मैं धर्मेंद्र प्रधान को लंबे समय से जानता हूं। वह देश के प्रति समर्पित कार्यकर्ता हैं। विद्यार्थी परिषद के समय से उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी गई, उन्होंने पूरी ईमानदारी से निभाई है।
सामूहिक निर्णय के बाद प्रधान ने पद छोड़ा
आंदोलन शुरू होते ही धर्मेंद्र प्रधान ने पार्टी नेतृत्व से कहा था यदि संगठन को उचित लगे तो हम इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उस समय पार्टी ने इसे स्वीकार नहीं किया। बाद में सामूहिक निर्णय के बाद उन्होंने पद छोड़ा। यही एक सच्चे और अनुशासित कार्यकर्ता की पहचान होती है।
विदेशी ताकतों के मंसूबे फेल
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उन ताकतों की मंशा विफल हो गई जो देश में हिंसा और अस्थिरता का माहौल बनाना चाहती थीं। विजयवर्गीय ने कहा- कुछ विदेशी ताकतें बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी स्थिति भारत में पैदा करना चाहती थीं, लेकिन उनके मंसूबे सफल नहीं हुए।
RSS को समझें राहुल गांधी
राहुल गांधी पहले RSS को समझें है। RSS ने देश और समाज के लिए लंबे समय तक काम किया है। उसके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।