अगले महीने व्यापार वार्ता के लिए भारत आ सकता है अमेरिकी दल: पीयूष गोयल
अगले महीने व्यापार वार्ता के लिए भारत आ सकता है अमेरिकी दल: पीयूष गोयल
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने गुरुवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर वार्ता के लिए अमेरिकी दल अगले महीने भारत आ सकता है। ऐसे समय में यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए लगातार बातचीत जारी है।
दिल्ली में एमचैम सम्मेलन के दौरान दी जानकारी
पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में आयोजित American Chamber of Commerce in India (एमचैम) के वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ट्रेड टीम भारत आने की योजना बना रही है, हालांकि अमेरिका के मुख्य ट्रेड नेगोशिएटर के इस दौरे में शामिल होने की संभावना फिलहाल कम है।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि वह उनके साथ नहीं आ रहे हैं, लेकिन अगले महीने टीम के भारत आने की योजना जरूर है।”
गौरतलब है कि भारतीय पक्ष ने अप्रैल में वॉशिंगटन डीसी में अमेरिकी समकक्षों के साथ आमने-सामने बैठक कर व्यापार समझौते को लेकर चर्चा की थी।
चालू खाता घाटे पर सरकार की नजर
रुपये में गिरावट और बढ़ते चालू खाता घाटे (Current Account Deficit – CAD) को लेकर पूछे गए सवाल पर पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।
उन्होंने कहा कि सरकार के सभी विभाग एक टीम के रूप में काम कर रहे हैं और कई उपायों पर विचार किया जा रहा है। गोयल ने कहा कि वैश्विक आर्थिक हालात चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन भारत इस परिस्थिति से मजबूती से निपटने में सक्षम है।
उन्होंने कहा, “हमें विश्वास है कि इस चुनौतीपूर्ण समय में भी भारत सफल होगा। भारत का भविष्य उज्ज्वल है और देश के पास मजबूत क्षमताएं हैं।”
क्या होता है चालू खाता घाटा (CAD)?
चालू खाता घाटा (CAD) तब बढ़ता है, जब किसी निश्चित अवधि में आयातित वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य, निर्यात और अन्य प्राप्तियों से अधिक हो जाता है। यानी देश जितना कमाता है, उससे ज्यादा खर्च करने की स्थिति बनती है।
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भारत का CAD बढ़कर 13.2 अरब डॉलर (GDP का 1.3%) हो गया था, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 11.3 अरब डॉलर था। हालांकि अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान यह घटकर 30.1 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष समान अवधि में 36.6 अरब डॉलर था।
भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार वार्ता को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निर्यात, निवेश और व्यापारिक सहयोग को नई गति मिल सकती है।






