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उज्जैन में आज महाकाल की अंतिम सवारी: सात स्वरूपों में दिए दर्शन; मुस्लिम समुदाय ने बरसाए फूल

उज्जैन। भाद्रपद माह की दूसरी और अंतिम सवारी सोमवार को बाबा महाकाल की भव्य राजसी सवारी के रूप में निकाली गई।

शाम 4 बजे भगवान महाकाल चांदी की पालकी में श्री चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकलें। इस दौरान बाबा महाकाल के छह स्वरूपों के दर्शन श्रद्धालुओं को हुए।

गार्ड ऑफ ऑनर दिया
सवारी से पहले मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर का विधि-विधान से पूजन किया जाएगा। इसके बाद मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल द्वारा बाबा महाकाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। पालकी महाकाल रोड, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी और हरसिद्धि पाल होते हुए रामघाट पहुंचेगी।

यह रहेगा रूट 
रामघाट पर भगवान महाकाल और हाथी पर विराजित श्री मनमहेश का मां क्षिप्रा के तट पर पूजन और आरती हुई। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, तेलीवाड़ा, कंठाल, सती गेट, सराफा और छत्री चौक होते हुए गोपाल मंदिर पहुंचेगी। यहां सिंधिया स्टेट की परंपरा के अनुसार भगवान का पूजन किया गया। इसके बाद सवारी पटनी बाजार, गुदरी और महाकाल चौराहा होते हुए मंदिर लौटेगी।

सात स्वरूपों में दिए दर्शन
राजसी सवारी में श्री चंद्रमोलेश्वर, श्री मनमहेश, श्री शिव तांडव, श्री उमा-महेश, होल्कर स्टेट के मुखारविंद और श्री सप्तधान स्वरूप शामिल रही, चल समारोह में 73 भजन मंडलियां, साधु-संत, बैंड, पुलिस बल और विभिन्न दल भी हिस्सा लिया। साथ ही सिंहस्थ महापर्व 2028 की झांकी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रही।

फॉगिंग मशीन से श्रद्धालुओ को मिली राहत
बाबा महाकाल की सवारी में श्रद्धालुओं की सुविधा का भी खास ख्याल रखा गया। उमस और गर्मी के बीच मार्ग पर लगातार फॉगिंग कर वातावरण को ठंडा रखने की व्यवस्था की गई। सवारी में कोयंबटूर से पहुंचा ईशा फाउंडेशन का विशेष बैंड भक्तिमय धुनें बिखेरता नजर आया। करीब 70 भजन मंडलियों ने भी माहौल को शिवमय बना दिया। धार्मिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालु आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे।

एलईडी स्क्रीन के जरिए सवारी का लाइव प्रसारण
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समिति ने चलित रथ की व्यवस्था की है। रथ पर लगी एलईडी स्क्रीन के जरिए सवारी का लाइव प्रसारण हुआ। फ्रीगंज, नानाखेड़ा और दत्तअखाड़ा सहित अन्य क्षेत्रों में भी श्रद्धालुओ ने  लाइव दर्शन किए।

ड्रोन से हुई पुष्पवर्षा
महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन के अनुसार, राजसी सवारी में विशेष ड्रोन से पुष्पवर्षा की गई। इसके लिए देश-विदेश की किस्मों के 50 क्विंटल फूल मंगाए गए। जैसे ही सवारी मंदिर प्रांगण से निकली ड्रोन से पुष्प वर्षा की शुरुआत हुई। इसके बाद मंदिर के मुख्य दुवार पर गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान पहली बार ड्रोन से पुष्पवर्षा हुई।

मुस्लिम समाज ने पुष्पवर्षा की 
इसके बाद शिप्रा तट और गोपाल मंदिर पर भी फूल बरसाए जाएंगे। 7 किलोमीटर लंबे रास्ते पर जगह-जगह मंच लगातार बाबा का स्वागत श्रद्धांलु करते नज़र आए। वहीं, सांप्रदायिक सौहार्द की खूबसूरत मिसाल भी देखने को मिली। मुस्लिम समाज के लोगों ने मंच और घरो की छत पर से पुष्पवर्षा कर बाबा महाकाल का आत्मीय स्वागत किया।

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