‘मंत्रीजी के घर’ में सिस्टम बीमार: सवाल- कैसे सुधरेगी व्यवस्था..?; इलाज से डर रहे लोग

स्वतंत्र शुक्ला। रीवा। शहर के बीचोंबीच स्थित अमहिया से संजय गांधी अस्पताल की दूरी महज 1.8 किलोमीटर है। यानी स्वास्थ्य मंत्री के घर से करीब सात मिनट में विंध्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पहुंचा जा सकता है। फिर भी यहां इलाज की व्यवस्था ऐसी नजर आ रही है, मानो स्वास्थ्य सेवाएं 70 साल पुरानी हों।
जिस अस्पताल पर पूरे विंध्य के लोग भरोसा करते थे, अब वहां जाने से लोग डरने लगे हैं। कारण है जच्चा-बच्चा की मौत, जिंदा मरीज को मृत घोषित कर पोस्टमार्टम के लिए भेज देना, डॉग बाइट के मरीज को स्नेक बाइट का इंजेक्शन लगा देना और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की सीलिंग का गिरना। सवाल यही है कि स्वास्थ्य मंत्री के शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था आखिर कब बदलेगी?
पहला मामला- कल्पना मिश्रा और उसके बच्चे की मौत
25 वर्षीय कल्पना मिश्रा को 25 अगस्त को संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 26 अगस्त की रात 8.30 बजे उसका सी-सेक्शन किया गया। तीन घंटे बाद कल्पना और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। मौत से पहले का एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें कल्पना महिला वार्ड से बाहर निकलकर मदद मांग रही थी।

दूसरा मामला- जिंदा मरीज को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
सीधी निवासी गिरजा प्रसाद को गंभीर हालत में संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टर ने 5 सितंबर को उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए और शव वाहन भी बुक कर लिया। इसी दौरान मरीज के हाथ-पैर में हरकत हुई। सांस चलती देख परिजनों ने इसकी जानकारी अस्पताल स्टाफ को दी, जिसके बाद मरीज को दोबारा इलाज के लिए वार्ड में शिफ्ट किया गया।
मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. पीके बघेल ने कहा कि प्रथम दृष्टया छात्र ने मरीज की जांच के बाद उसे मृत घोषित किया था। उन्होंने इसे मेडिकल साइंस में बताई जाने वाली दुर्लभ स्थिति ‘लाजरस सिंड्रोम’ से जोड़ा।

संजय गांधी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे आयुष सिंह को कुत्ते ने काटा था। उन्होंने डॉक्टर को इसकी जानकारी भी दी। इसके बावजूद उन्हें स्नेक बाइट का इंजेक्शन लगा दिया गया। युवक के मुताबिक, बाद में उसे डॉग बाइट की डोज भी दी गई।

चौथा मामला- सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में सीलिंग गिरी
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के तीसरे तल स्थित यूरोलॉजी विभाग में सीलिंग का एक हिस्सा गिर गया। हालांकि घटना के समय वहां कोई मरीज या कर्मचारी मौजूद नहीं था। इससे पहले अस्पताल के न्यूरो सर्जरी वार्ड और गैलरी की सीलिंग भी गिर चुकी है।

पांचवा मामला- मरीज के शरीर में कीड़े
सतना निवासी अर्चना गुप्ता के परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उन्होंने इलाज के दौरान शरीर में कीड़े पड़ने जैसी स्थिति का दावा किया। परिजन उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाना चाहते थे, लेकिन डॉक्टरों ने रेफर नहीं किया। इसी दौरान आईसीयू में वीडियो बनाने पहुंचे परिजनों का मोबाइल भी डॉक्टर ने जब्त कर लिया। इसके बाद हंगामा हुआ। फिलहाल अर्चना आईसीयू-2 में भर्ती हैं।

दिग्विजय सिंह बोले- व्यापमं भर्ती का नतीजा
देर रात पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह रीवा पहुंचे। जयस्तंभ चौराहे पर धरने में शामिल हुए। दिग्विजय सिंह ने संजय गांधी अस्पताल में हाल के दिनों में सामने आए मामलों का जिक्र करते हुए कहा- यहां कभी जीवित व्यक्ति का पोस्टमार्टम करने जैसी गंभीर स्थिति सामने आती है तो कभी प्रसूता और नवजात की मौत का मामला सामने आता है। आखिर इतनी गंभीर लापरवाहियों के लिए जवाबदेही किसकी तय होगी। स्वास्थ्य व्यवस्था में लगातार सामने आ रही खामियों के पीछे भर्ती प्रक्रिया और नर्सिंग व्यवस्था में हुई गड़बड़ियों की भी जांच होनी चाहिए। व्यापमं और नर्सिंग भर्तियों से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए सरकार से जवाब मांगा। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा- स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था को लेकर प्रदेशभर से लगातार गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सरकार को जवाबदेही तय करनी होगी। दोषियों पर कार्रवाई करनी होगी। कांग्रेस की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने के लिए है।

कल्पना के पिता बोले- बेटी की हत्या हुई है
कल्पना के पिता रामशिरोमणि मिश्रा ने कल्पना की मौत को हत्या बताया। वो सिरमौर चौराहे में आमरण अनशन पर बैठे है। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर की मांग कर रहे हैं। हालांकि अस्पताल के पांच स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई हुई। डीन भी बदल दिए गए।

सतना डीन शशिधर गर्ग को भेजा रीवा
- 28 अगस्त को ड्यूटी डॉक्टर सोनल अग्रवाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ/एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ. निधि पांडे और दो नर्सिंग ऑफिसर्स को निलंबित किया गया।
- 29 अगस्त को पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। 1 सितंबर को अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को हटाने का आदेश जारी हुआ।
- 4 सितंबर को मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए। 6 सितंबर को सतना के डीन शशिधर गर्ग की पदस्थापना रीवा में की गई।
- विंध्य नागरिक अधिकार मंच ने रविवार को भोपाल में गांधी प्रतिमा के सामने धरना दिया। मंच के अध्यक्ष दिलीप तिवारी ने कल्पना मिश्रा की मौत के मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाई।

लापरवाही एक बार हो सकती है, बार-बार नहीं
आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने कहा- संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल की व्यवस्था धराशायी हो गई है। यहां आए दिन ऐसे मामले आते हैं और लापरवाही बता दी जाती है। लापरवाही तो एक बार होती है। बार बार घटना होना लापरवाही नहीं है। कल्पना मिश्रा की मौत और जीवित व्यक्ति के पोस्टमार्टम के मामले ने अस्पताल प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

डॉक्टर इलाज की जगह कर रहे हत्या
सामाजिक कार्यकर्ता बीके माला ने कहा- संजय गांधी में डॉक्टर इलाज की जगह हत्या कर रहे हैं। उनके मुताबिक यह लापरवाही नहीं, बल्कि अपराध है।उन्होंने कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि अब तक कई कल्पना मिश्रा की मौत हो चुकी है, लेकिन वे सामने नहीं आ पाईं।

स्वास्थ्य सुविधाओं को बदनाम ना करे कांग्रेस
भाजपा रीवा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता ने कहा कि कल्पना मिश्रा की मौत बेहद दुखद है। भाजपा परिजनों के साथ खड़ी है। मामले में निलंबन, डीन का स्थानांतरण और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश हो चुके हैं। जांच में जो भी दोषी मिलेगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी। कांग्रेस को इस दुखद घटना का राजनीतिक इस्तेमाल करने के बजाय परिवार के साथ खड़ा होना चाहिए। रीवा की स्वास्थ्य सुविधाओं को बदनाम करने की राजनीति जनता सफल नहीं होने देगी।

‘दोषियों पर होगी कार्रवाई’
एसएसएमसी की अधीक्षक डॉ. प्रियंका शर्मा ने कहा कि कल्पना मिश्रा मामले के दौरान वह पदस्थ नहीं थीं।


हाई लेवल मीटिंग के बाद शशिधर गर्ग पहुंचे रीवा
इधर रविवार को उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला की हाई लेवल मीटिंग हुई। इसके कुछ देर बाद श्यामशाह मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल का भी ट्रांसफर कर दिया गया।