सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से न्यायिक ढांचा मजबूत करने का आग्रह किया, जघन्य मामलों की छह महीने में सुनवाई का प्रस्ताव

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से देश में न्यायिक बुनियादी ढांचा मजबूत करने का आग्रह करते हुए कहा है कि अदालतें जघन्य अपराधों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी करने के लिए “दिन-रात” काम करने को तैयार हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि इससे लंबी कार्यवाही के कारण आरोपियों को आसानी से ज़मानत मिलने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
पीठ ने यह भी कहा कि मुकदमेबाजी की लागत आज बहुत अधिक है और यदि सुनवाई निर्धारित समय-सीमा में पूरी हो जाए तो यह सभी पक्षों के लिए लाभकारी होगा। अदालत ने केंद्र से विशेष रूप से एनआईए और अन्य विशेष-विधि अदालतों की स्थापना की दिशा में तेजी लाने का सुझाव दिया, ताकि जघन्य और संवेदनशील मामलों में लंबित मामलों की संख्या कम की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गवाही प्रणाली को व्यापक रूप से अपनाने का भी समर्थन किया है। पीठ ने कहा कि इससे गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और सुनवाई की प्रक्रिया अधिक कुशल एवं तेज़ बन सकेगी। न्यायालय का मानना है कि तकनीकी समाधान न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
केंद्र सरकार ने पीठ को जानकारी दी कि राज्यों के साथ इस विषय पर चर्चा पहले से चल रही है और जल्द ही एक विस्तृत रूपरेखा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। यह टिप्पणी तब आई जब अदालत महाराष्ट्र में 2019 में हुए आईईडी विस्फोट मामले में आरोपी कैलाश रामचंदानी की ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 15 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।






