स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर बढ़ेगी सख्ती, बैठक में तय हुए नियम, उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई
इंदौर में स्कूल बसों में सफर करने वाले हजारों बच्चों की सुरक्षा को लेकर बैठक आयोजित की गई। इसमें तय किया गया कि स्कूल बसें अब 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ज्यादा से नहीं चल सकेंगी। इससे ज्यादा रफ्तार मिली तो बसों पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बसों में जीपीएस सीसीटीवी, स्पीड गवर्नर अनिवार्य लगाना होगा।
बैठक में शहर के 100 से ज्यादा स्कूल हुए शामिल
बैठक में शामिल शहर के 100 से ज्यादा स्कूल- कॉलेजों के ट्रांसपोर्ट अधिकारी और प्रतिनिधियों को ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों और बस संचालकों पर कार्रवाई की जाएगी। रानी सराय सभागार में हुई बैठक में सभी स्कूल वाहनों में फिटनेस की नियमित जांच कराने, प्रशिक्षित और वैध लाइसेंसधारी ड्राइवर रखने एवं चालक-परिचालकों का पुलिस वेरिफिकेशन कराने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने यह भी कहा कि ड्राइवरों की समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि वे नशे की हालत में वाहन न चलाएं।
स्कूल बसों की चेकिंग का अभियान भी चलाया जाएगा
यातायात पुलिस ने स्कूल प्रबंधन से यह भी कहा कि वे समय-समय पर विद्यार्थियों से फीडबैक लें कि चालक बस सुरक्षित तरीके से चला रहा है या नहीं। बस में किसी तरह की तकनीकी खराबी तो नहीं है। बैठक में कुछ स्कूलों ने अपनी बसों में लगाए गए ब्रेथ एनालाइजर सिस्टम और अन्य सुरक्षा उपायों की जानकारी भी साझा की। अफसरों ने कहा- जल्द ही स्कूल बसों की चेकिंग का अभियान भी चलाया जाएगा। जिन बसों में सुरक्षा मानकों की कमी मिलेगी, उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
बच्चो से लेंगे फीडबैक
पुलिस अफसरों ने कहा- यदि स्कूल बस में तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग, खराब फिटनेस, सीसीटीवी या जीपीएस नहीं है, चालक मोबाइल पर बात करता है या लापरवाही से वाहन चलाता है तो अभिभावक इसकी शिकायत तुरंत स्कूल प्रबंधन और यातायात पुलिस से करें। बच्चों से भी रोज पूछें कि बस सुरक्षित तरीके से चलाई जा रही है या नहीं।
इन नियमों का पालन जरुरी
बैठक के बाद से अब स्कूल बस में ये सुविधाएं होना अनिवार्य कर दिया गया है। बसों की जानकारी रखने के लिए उसमे जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम होना अनिवार्य है। बच्चो की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे होना भी जरुरी है। स्पीड की जांच करने ले लिए स्पीड गवर्नर भी आवश्यक होगा। आपत्कालीन स्थिति के लिए फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशमन यंत्र को भी अनिवार्य किया गया है। इसके साथ इमरजेंसी गेट की व्यवस्था और अपडेटेड फिटनेस सर्टिफिकेट भी होना चाहिए। ड्राइवर के पास वैध हैवी व्हीकल लाइसेंस, चालक-परिचालक का पुलिस वेरिफिकेशन, ड्राइवर की स्वास्थ्य जांच, नशे की हालत में वाहन चलाने पर सख्त कार्रवाई और विद्यार्थियों से समय-समय पर सुरक्षा संबंधी फीडबैक लेना भी अनिवार्य किया गया है।
इसलिए लिया निर्णय
यह सब इसलिए जरूरी किया गया है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश के अलग- अलग जिलों में स्कूल बसों से जुड़े हादसे, ओवरलोडिंग, बिना फिटनेस चल रहे वाहन और लापरवाह ड्राइविंग के मामले सामने आते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल बसों के लिए सुरक्षा मानक तय किए थे।