सीलिंग की जमीन पर तान दी 200 करोड़ की कॉलोनी; कॉलोनी सेल अफसरों की मेहरबानी से सजी ‘स्वास्तिक ग्रांड’: बिल्डर को मिला स्टे

इंदौर। जिला प्रशासन के कॉलोनी सेल की एक बड़ी लापरवाही और अनदेखी ने करीब 200 करोड़ रुपए की जमीन पर अवैध विकास का खेल खड़ा कर दिया है। हातोद के ग्राम सोनगीर में बिल्डर नीलेश चौधरी और उनके परिवार द्वारा विकसित की जा रही ‘स्वास्तिक ग्रांड’ कॉलोनी अब गहरे विवादों में घिर चुकी है। कॉलोनी सेल के अधिकारियों ने बिना दस्तावेजों की गहन जांच किए सीलिंग की जमीन पर कॉलोनी की विकास अनुमति जारी कर दी। मामला उजागर होने पर प्रशासन ने कागजी कार्रवाई तो की, लेकिन अपनी ही सुस्ती के चलते बिल्डर को स्टे लाने का मौका भी दे दिया।
इस पूरे मामले की पोल तब खुली जब पड़ोसी जमीन के मालिक ने विकास अनुमति के लिए आवेदन किया। स्वास्तिक ग्रांड कॉलोनी के पास ही बिल्डर अश्विन मेहता के भाई नवीन मेहता की जमीन स्थित है। नवीन के बेटे मेहुल मेहता की कंपनी ‘ल्यूमिनस इन्फ्रा प्रोजेक्ट’ भी सर्वे नंबर 12 पर ही प्रस्तावित है। करीब दो महीने पहले जब मेहुल ने कॉलोनी सेल में विकास अनुमति के लिए आवेदन दिया, तो एसडीएम और कॉलोनी सेल प्रभारी रोशनी पाटीदार ने जमीन को सीलिंग की बताकर अनुमति देने से इनकार कर दिया। इस पर मेहुल ने सवाल उठाया कि इसी सर्वे नंबर पर नीलेश चौधरी के ‘स्वास्तिक ग्रांड’ प्रोजेक्ट को अनुमति किस आधार पर दे दी गई?
फाइल से गायब थी मूल आदेश की प्रति
मेहुल के इस खुलासे के बाद जब अधिकारियों ने स्वास्तिक ग्रांड की फाइल खंगाली, तो उनके होश उड़ गए। फाइल में विकास अनुमति के मूल आदेश की प्रति मौजूद ही नहीं थी, वहां केवल एक आदेश नंबर दर्ज था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य ने जांच शुरू की, जिसमें साफ हो गया कि लगभग 17 हेक्टेयर में बन रही इस कॉलोनी का सबसे बड़ा हिस्सा यानी करीब साढ़े चार हेक्टेयर का सर्वे नंबर 12 पूरी तरह से सीलिंग की जमीन है। गड़बड़ी साबित होने के बाद प्रशासन ने 3 जुलाई को कॉलोनी की विकास अनुमति रद्द कर दी।
अनुमति रद्द की, लेकिन दबाकर बैठ गए अफसर
विकास अनुमति रद्द करने के बाद भी कॉलोनी सेल के अफसरों की रहस्यमयी चुप्पी जारी रही। अधिकारियों ने न तो इस आदेश को सार्वजनिक किया और न ही रेरा (RERA) को सूचना देकर कॉलोनी का पंजीयन रद्द कराया। इसके अलावा कॉलोनी की रजिस्ट्री पर रोक लगाने और राजस्व रिकॉर्ड में जमीन को सीलिंग दर्ज करने जैसी बुनियादी कार्रवाइयों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। प्रशासन की इसी सुस्ती का पूरा फायदा बिल्डर नीलेश चौधरी ने उठाया।
कछुआ चाल से जागा प्रशासन, बिल्डर ले आया स्टे
प्रशासन जब 15 दिन बाद नींद से जागा और रिकॉर्ड में जमीन को सीलिंग दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की, तब तक बिल्डर बाजी मार चुका था। देरी का फायदा उठाकर नीलेश चौधरी संभागायुक्त कोर्ट पहुंच गए और उसी दिन आदेश पर स्टे ले आए। दूसरी ओर, अपने आवेदन पर दोहरा रवैया अपनाए जाने से नाराज मेहुल मेहता प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट की शरण में चले गए हैं।
18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई, साधे हुए हैं चुप
कुल 17 हेक्टेयर में विकसित हो रही स्वास्तिक ग्रांड कॉलोनी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी विवादित सर्वे नंबर 12 पर स्थित है। कलेक्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने वाली बिल्डर की याचिका पर संभागायुक्त कोर्ट में अगली सुनवाई 18 अगस्त को होना तय हुई है। इस पूरे घटनाक्रम और प्रशासनिक ढिलाई पर जब अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य, एसडीएम रोशनी पाटीदार और बिल्डर नीलेश चौधरी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो सभी फोन और मैसेज का जवाब देने से बचते रहे।