संघ की विचारधारा महिला केंद्रित, राष्ट्र निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका अहम : डॉ. शोभा विजेंद्र

Shobha Vijender ने कहा कि संघ की विचारधारा से उपजे विचार और कार्य पूर्णरूपेण महिला केंद्रित हैं, क्योंकि महिलाओं के योगदान के बिना परिवार, समाज और राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं है।
उन्होंने यह बात मुंबई के Nehru Centre स्थित हॉल ऑफ हार्मनी में आयोजित ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ विषयक कार्यक्रम में कही। इस आयोजन का आयोजन कमला ट्रस्ट के सहयोग से किया गया।
डॉ. शोभा विजेंद्र ने कहा कि Rashtriya Swayamsevak Sangh और Rashtra Sevika Samiti क्रमशः पुरुष और महिला के व्यक्तित्व निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने अपनी पुस्तक ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर दर्शाती है कि संघ में महिलाओं की भूमिका केवल सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें मां, मातृभूमि और जगन्माता के स्वरूप में देखा जाता है।
महिला नेतृत्व और सहभागिता पर चर्चा
कार्यक्रम की अध्यक्षता वर्षा तावड़े और निदर्शना गोवानी ने की। वर्षा तावड़े ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ने के बाद उनमें राष्ट्र को सर्वोपरि मानने का भाव विकसित हुआ।
उन्होंने कहा कि संघ स्त्री और पुरुष को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि एक-दूसरे का पूरक मानता है।
निदर्शना गोवानी ने महिला सहभागिता को हर संगठन का महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि महिलाएं घर और संगठन दोनों में जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा और दक्षता से निभाती हैं।
महिलाओं की भूमिका पर विशेष जोर
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता भाग्यश्री (चंदा) साठये ने कहा कि महिलाओं की सहभागिता और महिला कार्य में संघ के योगदान पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि संघ में महिलाएं प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने आपातकाल के दौर में संघ पर लगे प्रतिबंधों और उस समय समाज की भूमिका का भी उल्लेख किया।
“संघ केवल संगठन नहीं, सामाजिक शक्ति”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि Pradeep Joshi ने कहा कि संघ को प्रसिद्धि की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ ऐसा संगठन है जिसे समझना आसान नहीं, क्योंकि इसके बारे में समाज में कई भ्रम फैले हुए हैं।
उन्होंने मातृशक्ति की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि संघ के हर कार्य में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी जरूरी
कार्यक्रम के अंत में सामाजिक कार्यकर्ता और विचारक Geeta Tai Gunde का सम्मान किया गया। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज कई महत्वपूर्ण पदों तक पहुंच रही हैं, लेकिन राजनीति और नीति निर्माण में उनकी भागीदारी अभी भी सीमित है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज में महिलाओं के निर्णय लेने की क्षमता पर विश्वास बढ़ना चाहिए और महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में आगे आने के लिए अपनी क्षमताओं को और मजबूत करना होगा।






