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रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले रिश्वत लेते पकड़ाया एक्जीक्यूटिव इंजीनियर: नगर निगम ने थमाया सिर्फ 25 लाख का चेक, पेंशन भी अटकी

इंदौर/ग्वालियर। नगर निगम में रिश्वतखोरी के आरोप में रंगे हाथों पकड़े गए कार्यपालन यंत्री (एक्जीक्यूटिव इंजीनियर) सुशील कटारे को शुक्रवार को उनके कार्यकाल के अंतिम दिन औपचारिक रूप से रिटायर कर दिया गया। सेवानिवृत्ति के मौके पर निगम प्रशासन ने उन्हें प्रोविडेंट फंड (PF) मद से महज 25 लाख रुपए का चेक सौंपा, जबकि नियमानुसार उन्हें कुल 60 लाख रुपए के वित्तीय लाभ मिलने थे। रिश्वतकांड में लोकायुक्त कार्रवाई के चलते उनके शेष वित्तीय स्वत्वों पर रोक लगा दी गई है। वहीं, निगम मुख्यालय में आयोजित हुए सामूहिक सेवानिवृत्ति विदाई समारोह में भी आरोपी अधिकारी को बुलावा भेजा गया था, लेकिन वे शर्मिंदगी के चलते कार्यक्रम में शामिल होने नहीं पहुंचे।

ठेकेदार से 1 फीसदी कमीशन लेते लोकायुक्त ने दबोचा था
मामले के अनुसार, कार्यपालन यंत्री सुशील कटारे का 31 अगस्त को शासकीय सेवा का अंतिम दिन था। इससे ठीक एक दिन पहले यानी गुरुवार को वे अपने ही नगर निगम कार्यालय में एक ठेकेदार के लंबित बिल का भुगतान कराने के एवज में एक प्रतिशत (छह हजार रुपए) की रिश्वत ले रहे थे। ठेकेदार की शिकायत पर लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाकर कटारे को उनके दफ्तर की टेबल पर ही रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था। रिटायरमेंट से ठीक 24 घंटे पहले हुई इस कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया था।

अदालत का फैसला आने तक रोकी गई पेंशन और ग्रेच्युटी
लोकायुक्त में आपराधिक मामला दर्ज होने के कारण निगम प्रशासन ने नियम के तहत कठोर कदम उठाया है। कटारे को मिलने वाले करीब 60 लाख रुपए के स्वत्वों में से फिलहाल सिर्फ 25 लाख रुपए का प्रोविडेंट फंड जारी किया गया है, जबकि पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य भत्तों की राशि को पूरी तरह से होल्ड पर रख दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक जब तक न्यायालय में इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती और वे दोषमुक्त नहीं हो जाते, तब तक उन्हें किसी भी प्रकार की मासिक पेंशन या अन्य वित्तीय लाभ नहीं दिए जाएंगे।

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