‘पुलिस ने कान में कहा- सरकार हटाइए’: राहुल गांधी बोले-PM मोदी छात्रों से माफी मांगें; धर्मेंद्र प्रधान को जाना होगा

दिल्ली। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को दिल्ली के इंदिरा भवन में छात्रों के खिलाफ लाठीचार्ज पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने प्रेजेंटेशन में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो मार्च में शामिल छात्रों के वीडियो दिखाए।
इस दौरान उन्होंने छात्रों की मांगों और पीएम हाउस के सामने धरने के दौरान हुए हंगामे का जिक्र किया। उन्होंने कहा- पुलिसवाले मुझे घसीट कर ले गए लेकिन वो कान में कह रहे थे कि इस सरकार को हटाइए।
राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा- सचुमच में वे ऐसा कह रहे थे। एक पुलिसकर्मी ने कहा- मैं राजस्थान का हूं। इस सरकार को हटाइए। हम सिर्फ वर्दी पहने हैं। दूसरा पुलिसकर्मी कहा- मैं हरियाणा का हूं। इनको हटाइए। तो वहां पुलिस के बीच भी ऐसा ही माहौल है। सच्चाई सब कोई जानता है। उन बेचारों को ऑर्डर मानना पड़ता है। इसलिए वो मानते हैं, लेकिन जो हुआ है उससे पुलिस भी नाखुश है। समझदार पुलिसवाले समझते हैं कि बच्चों के साथ क्राइम किया गया है।
राहुल गांधी ने कहा- मुझे मेरे साथ हुए बर्ताव की चिंता नहीं है। मेरे साथ जो व्यवहार हुआ उससे पांच गुना और गलत व्यवहार सरकार मेरे साथ करे लेकिन फोकस छात्रों पर होना चाहिए। छात्रों को सिस्टम में चेंज चाहिए। कल मेरे मुंह से खून निकल रहा था, लेकिन हम छात्रों की मांग के साथ डटे थे।

यह एक ऐसा आंकड़ा है जिसे देश का हर युवा जानता है। लेकिन भारत सरकार इसे नहीं समझ रही। एक उदाहरण देखिए- सिर्फ एक परीक्षा की तैयारी और उसे देने में छात्रों के परिवारों का जितना खर्च होता है। वह लगभग देश के पूरे शिक्षा बजट के बराबर है। – राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष
10 साल में 152 पेपर लीक हुए
इस दौरान राहुल गांधी ने कहा- सुरक्षाबलों ने छात्रों को बुरी तरह पीटा। ऐसा क्यों किया गया। नीट पेपर लीक से देश के 7.5 करोड़ स्टूडेंट्स और उनके परिवार इस घटना से प्रभावित हुए हैं। नीट मामले में किसी भी को सजा नहीं हुई।
10 साल में 152 पेपर लीक देश में लीक हुए हैं। इनमें किसी भी मामले में किसी भी को सजा नहीं मिली। 1.4 लाख करोड़ भारत सरकार का एजुकेशन बजट है। 1.32 लाख करोड़ भारतीय परिवार नीट एग्जाम पर खर्च करते हैं। NEET का खर्च देश के शिक्षा बजट से ज्यादा है।
भविष्य को नष्ट किया जा रहा
राहुल गांधी ने कहा- कोई व्यक्ति या लोगों का एक समूह हमारी शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर रहा है। भारत की सबसे मूल्यवान संपत्ति शिक्षा व्यवस्था और छात्र हैं। लेकिन उनके भविष्य को नष्ट किया जा रहा है। सरकार क्या कर रही है? एक भी दोषसिद्धि (कन्विक्शन) नहीं हुई है। यही पहला और पूरी तरह से जायज कारण है कि हमारे युवा सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

अब तक एक भी दोषी को सजा नहीं
राहुल गांधी ने कहा- इस समस्या से 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं। ये सभी मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों से आते हैं। वे अपनी मेहनत की कमाई अपने बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं, लेकिन उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है मानो उनकी मेहनत और उम्मीदों का कोई मूल्य ही न हो।
सबसे हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े मामलों के बावजूद एक भी दोषसिद्धि नहीं हुई है। हर किसी के लिए यह साफ है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था, जिसे कभी दुनिया की सबसे बेहतरीन शिक्षा प्रणालियों में गिना जाता था। आज गंभीर संकट का सामना कर रही है।

तनाव में आकर आत्महत्या कर लेते हैं छात्र
बच्चों ने आत्महत्या तक की है। हमारे छात्र असीमित तनाव से गुजरते हैं। फिर आखिरी समय में उन्हें बताया जाता है कि परीक्षा का पेपर लीक हो गया है। यह एक वास्तविक और गंभीर समस्या है जो अब देश में बहुत गहरी हो चुकी है।

अधिकार मांगना अपराध नहीं
छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। वे सिर्फ अपनी मांगें रख रहे हैं। वे वही मांग रहे हैं, जिसका इस देश के छात्र होने के नाते उन्हें अधिकार है। वे कोई अपराध नहीं कर रहे हैं। वे सिर्फ इतना कह रहे हैं कि हमें ऐसी शिक्षा व्यवस्था चाहिए जो ठीक से काम करे, जो निष्पक्ष हो। लेकिन आज हमारे पास ऐसी व्यवस्था नहीं है।
सवाल यह है कि हमारे छात्रों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है? आखिर हमारे छात्रों ने ऐसा क्या किया है? हजारों-हजार छात्र हैं, उन्होंने ऐसा कौन-सा अपराध किया है कि उन पर सुरक्षा बल हथियार तानें, उन्हें पीटा जाए, उनके साथ मारपीट की जाए और उनका अपमान किया जाए?

समस्या की गंभीरता को नहीं समझ रही सरकार
राहुल गांधी ने कहा- पेपर लीक के आंकड़े देश का हर युवा जानता है। सरकार इस समस्या की गंभीरता को नहीं समझ रही। एक परीक्षा की तैयारी और उसे देने में परिवार जितना खर्च करते हैं, वह शिक्षा पर होने वाले सरकारी खर्च के बराबर पहुंच जाता है।

मानसिक तनाव में हैं छात्र
राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों पर भारी मानसिक दबाव पड़ता है। कई छात्र लंबे समय तक तैयारी करते हैं और परीक्षा से पहले पेपर लीक होने की खबर मिलने पर निराश हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तनाव के कारण कुछ छात्रों ने आत्महत्या तक की है।
छात्र शांतिपूर्वक मांग रहे थे अपना अधिकार
राहुल गांधी ने कहा कि छात्र अपने अधिकारों की मांग को लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके अनुसार, छात्र केवल निष्पक्ष और भरोसेमंद शिक्षा व्यवस्था चाहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के साथ सख्ती क्यों की जा रही है।

देश की सबसे बड़ी ताकत को कमजोर कर रही सरकार
राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था देश की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन इसे कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई करने और छात्रों का भरोसा बहाल करने की मांग की।