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पीपल के पेड़ पर मचान बनाकर तपस्या में लीन ‘टाइगर बाबा’: शिप्रा किनारे देवशयनी से देवउठनी तक कठोर साधना; जानिए क्या है संकल्प

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में चातुर्मास के दौरान शिप्रा तट पर आस्था और साधना का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है। नरसिंह घाट पर एक पीपल के पेड़ पर बने छोटे से मचान पर श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के महंत गणेशानंद सरस्वती महाराज (टाइगर बाबा) कई सप्ताह से कठिन तपस्या में लीन हैं। नीचे बहती शिप्रा और सामने महाकाल का धाम इस साधना को और विशेष बना रहा है।

महंत गणेशानंद सरस्वती महाराज के अनुसार, उनका जन्म मध्यप्रदेश में हुआ था। महज 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने सांसारिक मोह-माया त्यागकर घर छोड़ दिया। इसके बाद विधि-विधान से अपना पिंडदान कर संन्यास की राह अपनाई और गुरु से दीक्षा ली। संन्यास के बाद वे गणेशानंद सरस्वती महाराज कहलाए और श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े से जुड़े। अब इन दिनों वह बाबा महाकाल की नगरी मे कठोर साधना करते हुए नज़र आ रहे है।

आखिर क्यों कर रहे कठोर साधन
महंत गणेशानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि देवशयनी एकादशी से शुरू की गई उनकी साधना देवउठनी एकादशी तक जारी रहेगी। इस दौरान उन्होंने अन्न का त्याग कर केवल जल और दूध ग्रहण करने का संकल्प लिया है। शिप्रा किनारे मचान पर बैठकर वे विश्व शांति और कल्याण के लिए ॐ नमः शिवाय का जाप, हवन और धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।

क्यों चुनी महाकाल की नगरी
बाबा गणेशानंद ने साधना के लिए नरसिंह घाट को चुना है, जिसके पीछे गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी है। मान्यता है कि हिरण्यकश्यप वध के बाद भगवान विष्णु का नरसिंह अवतार अत्यंत उग्र हो गया था। शिप्रा में स्नान करने के बाद उनका क्रोध शांत हुआ। स्कंद पुराण में भी नरसिंह घाट की इस महिमा का उल्लेख मिलता है। इसलिय बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन का तप, जप और साधना का विशेष महत्व शास्त्रों मे बताया गया है।

रक्षक है उज्जैन के राजा
पीपल के पेड़ पर मचान बनाकर साधना करने वाले बाबा गणेशानंद सरस्वती का कहना है कि जब साधना पूरी तरह भगवान को समर्पित हो जाए, तो कठिन परिस्थितियां भी तपस्या का हिस्सा बन जाती हैं। बाबा अपना तन-मन महाकाल को अर्पित मानते हैं और उन्हें विश्वास है कि स्वयं बाबा महाकाल उनकी रक्षा करते हैं। बारिश और तेज हवाओं के बावजूद वे मचान पर जप, हवन और धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। शिप्रा किनारे यह अनोखी साधना श्रद्धालुओं के लिए आस्था, तप और त्याग का आकर्षण बन गई है। जिसे देखने रोजाना सैकड़ो श्रद्धांलु पहुंच रहे है।

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