पैरा आर्मरेसलिंग की पैरालंपिक में एंट्री की राह आसान, ब्रिस्बेन 2032 के लिए पूरा हुआ अंतरराष्ट्रीय मानक

पैरा खेलों की दुनिया में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज करते हुए पैरा आर्मरेसलिंग ने ब्रिस्बेन 2032 पैरालंपिक खेलों में शामिल होने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल कर ली है। पीपुल्स आर्मरेसलिंग फेडरेशन इंडिया (पाफी) और प्रो पंजा लीग ने सोमवार को खुशी जताते हुए बताया कि इस खेल ने अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (IPC) द्वारा निर्धारित वैश्विक भागीदारी मानक को पूरा कर लिया है, जिससे इसके पैरालंपिक में शामिल होने की संभावना और मजबूत हो गई है।
विश्व आर्मरेसलिंग महासंघ द्वारा अतिरिक्त भागीदारी आंकड़े प्रस्तुत किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति ने पुष्टि की कि पैरा आर्मरेसलिंग में अब 32 से अधिक देशों की नियमित और व्यापक भागीदारी हो रही है। यह मानक किसी भी खेल को पैरालंपिक कार्यक्रम में शामिल किए जाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि पैरा आर्मरेसलिंग को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
भारत के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है, क्योंकि देश में पैरा आर्मरेसलिंग की प्रतिभा तेजी से उभर रही है। पिछले कुछ वर्षों में पाफी और प्रो पंजा लीग ने पैरा खिलाड़ियों को मंच देने और उन्हें प्रतिस्पर्धी माहौल उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। देशभर में आयोजित प्रतियोगिताओं और प्रो पंजा लीग के दोनों सत्रों में पैरा वर्ग को प्रमुखता से शामिल किया गया, जिससे कई खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला।
इन प्रतियोगिताओं के जरिए चंदन कुमार बेहरा, बुट्टा सिंह, श्रीनिवास बीवी, मोहन शर्मा और अरविंद रजक जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पैरा आर्मरेसलिंग को ब्रिस्बेन 2032 पैरालंपिक में आधिकारिक रूप से शामिल किया जाता है, तो भारत इस खेल में पदक जीतने की मजबूत दावेदारी पेश कर सकता है।
प्रो पंजा लीग के सह-संस्थापक परवीन डबास ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह सिर्फ वैश्विक आर्मरेसलिंग समुदाय के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के लिए भी गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि शुरू से ही उनका उद्देश्य पैरा खिलाड़ियों को समान पहचान और अवसर देना रहा है। उनके अनुसार, प्रो पंजा लीग ने हर सत्र में पैरा वर्ग को शामिल कर यह संदेश दिया है कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती।
वहीं, पीपुल्स आर्मरेसलिंग फेडरेशन इंडिया की अध्यक्ष और एशियाई आर्मरेसलिंग महासंघ की उपाध्यक्ष प्रीति झंगियानी ने कहा कि भारत लंबे समय से पैरा खेल प्रतिभाओं का केंद्र रहा है और आर्मरेसलिंग भी इसका अपवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि देशभर के पैरा खिलाड़ियों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है और अब यह उपलब्धि उन्हें और बेहतर अवसर देने की प्रेरणा देगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि यदि भारतीय खिलाड़ियों को उचित प्रशिक्षण, संसाधन और अंतरराष्ट्रीय मंच मिलता है, तो वे भविष्य में विश्व चैंपियन बनने की क्षमता रखते हैं। पैरा आर्मरेसलिंग की पैरालंपिक में संभावित एंट्री न केवल इस खेल के विकास को नई गति देगी, बल्कि दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए भी नए अवसरों के द्वार खोलेगी।






