खो-खो के मैदान से सीनियर टीम तक: रुताजा दादासो पिसाल की हॉकी यात्रा

महज 23 वर्ष की उम्र में रुताजा दादासो पिसाल ने अपने छोटे से गांव फलटन (सतारा, महाराष्ट्र) से निकलकर भारतीय सीनियर महिला हॉकी टीम में जगह बनाई है। उन्हें आगामी एफआईएच हॉकी महिला विश्व कप 2026 क्वालीफायर (8 से 14 मार्च, हैदराबाद, तेलंगाना) के लिए भारतीय टीम में चुना गया है।

रुताजा का खेल सफर खास रहा। उन्होंने बताया कि उनके हॉकी करियर की शुरुआत खो-खो जैसे खेलों से हुई। “हमारे शिक्षकों ने दौड़ और स्टैमिना देखकर हमें हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया। लगभग 12 साल की उम्र में मैंने हॉकी खेलना शुरू किया और पुणे की अकादमी में फिटनेस टेस्ट पास कर अपनी हॉकी यात्रा शुरू की।”

छोटे गांव में लड़कियों का खेलों में आगे आना आसान नहीं था। रुताजा ने कहा, “परिवार और गांव के कई लोग बच्चों को खेल के लिए बाहर भेजने के पक्ष में नहीं थे। लेकिन एक कोच ने हमें समर्थन दिया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।”

जूनियर से सीनियर तक का सफर
रुताजा ने राज्य और राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन कर जूनियर महिला हॉकी टीम में जगह बनाई। 2023 में महिला जूनियर एशिया कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहीं, जिसके बाद उन्हें सीनियर टीम में बुलाया गया। पिछले दो वर्षों से वह सीनियर राष्ट्रीय कैंप की नियमित खिलाड़ी हैं।

खेल में उनकी खासियत
मिडफील्ड में खेलते हुए भी उनके पास गोल करने के मौके आते हैं। सीनियर टीम के 20 मैचों में उन्होंने सात गोल किए हैं। इसका कारण यह भी है कि वह पहले फॉरवर्ड की भूमिका निभा चुकी हैं। रुताजा कहती हैं, “टीम की जरूरत के अनुसार खुद को ढालना जरूरी है।”

टीम और व्यक्तिगत लक्ष्य
रुताजा बताती हैं, “इस समय हमारा मुख्य लक्ष्य एफआईएच हॉकी विश्व कप के लिए क्वालीफाई करना है। बाद में लॉस एंजिलिस ओलंपिक में खेलना हमारा बड़ा सपना है।” अपनी तैयारी के बारे में उन्होंने कहा कि वह गोल करना, पेनल्टी कॉर्नर बनवाना, ड्रिब्लिंग गति और गेंद जल्दी वापस हासिल करना जैसी क्षमताओं पर काम कर रही हैं।

रुताजा दादासो पिसाल का यह सफर छोटे गांव से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक युवाओं के लिए प्रेरणादायक साबित हो रहा है।

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