नेपाल में प्रशासनिक सुधार की तैयारी, 18 हजार सरकारी कर्मचारियों की समयपूर्व विदाई की योजना

नेपाल सरकार प्रशासनिक सुधार के नाम पर सरकारी तंत्र में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 30 वर्ष की सेवा अवधि पूरी कर चुके या 55 वर्ष की आयु पार कर चुके हजारों सरकारी कर्मचारियों को समयपूर्व अवकाश दिया जा सकता है। इस योजना से लगभग 18 हजार कर्मचारियों के प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।

अध्यादेश के जरिए बदलाव की तैयारी

सरकारी सूत्रों के अनुसार सरकार अध्यादेश के माध्यम से कानून में संशोधन कर चपरासी से लेकर सचिव स्तर तक के कर्मचारियों पर यह व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। यदि प्रस्ताव लागू होता है तो कई वरिष्ठ अधिकारी एक साथ सेवा से बाहर हो सकते हैं।

सचिव स्तर पर बड़ा असर

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 55 वर्ष की आयु पूरी कर चुके सचिवों की संख्या 32 है, जबकि 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके सचिवों की संख्या 20 बताई जा रही है। प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में केवल सीमित संख्या में ही सचिव पद पर बने रह पाएंगे।

सहसचिव और उपसचिव भी होंगे प्रभावित

योजना के अनुसार बड़ी संख्या में सहसचिव और उपसचिव स्तर के अधिकारी भी प्रभावित होंगे।

  • 55 वर्ष आयु सीमा के कारण कई वरिष्ठ सहसचिवों को अवकाश लेना पड़ सकता है।
  • 30 वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने वाले अधिकारियों पर भी यह नियम लागू होगा।
  • उपसचिव और शाखा अधिकृत स्तर के हजारों कर्मचारी इस दायरे में आ सकते हैं।

हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा प्रभाव

सरकारी आंकड़ों के अनुसार विभिन्न श्रेणियों में हजारों कर्मचारी 55 वर्ष आयु सीमा और 30 वर्ष सेवा अवधि की शर्तों के कारण सेवा से बाहर हो सकते हैं। इससे प्रशासनिक ढांचे में बड़े पैमाने पर रिक्तियां उत्पन्न होने की संभावना है।

जुलाई से लागू हो सकती है व्यवस्था

रिपोर्टों के अनुसार नेपाल सरकार आगामी जुलाई के अंत से इस व्यवस्था को लागू करने पर विचार कर रही है। योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से सेवानिवृत्ति आयु सीमा को समायोजित करने का प्रस्ताव भी शामिल है।

वित्त मंत्रालय ने जताई आपत्ति

इस प्रस्ताव पर नेपाल के वित्त मंत्रालय ने वित्तीय संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए चिंता जताई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि बड़ी संख्या में कर्मचारियों को एक साथ सेवानिवृत्त किया जाता है तो सरकार पर पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य देनदारियों के रूप में भारी वित्तीय बोझ पड़ सकता है।

25 अरब रुपये तक का अतिरिक्त भार संभव

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस योजना के लागू होने पर नेपाल सरकार पर करीब 25 अरब नेपाली रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है। इसके बावजूद प्रशासनिक सुधार और सरकारी तंत्र में नई ऊर्जा लाने के उद्देश्य से इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा रहा है।

राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज

सरकार के इस कदम को लेकर नेपाल में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बहस शुरू हो गई है। समर्थकों का मानना है कि इससे प्रशासनिक सुधार और युवा अधिकारियों को अवसर मिलेगा, जबकि आलोचकों का कहना है कि अनुभवी कर्मचारियों की एक साथ विदाई से सरकारी कामकाज प्रभावित हो सकता है।

फिलहाल सरकार की ओर से अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।

Share

Similar Posts