दिल्ली के मुंडका-बक्करवाला टोल पर शुरू हुई बैरियर-लेस टोलिंग, अब बिना रुके स्वतः कटेगा शुल्क

देश में आधुनिक और निर्बाध यातायात व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (UER-II) पर स्थित मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) बैरियर-लेस टोलिंग प्रणाली का उद्घाटन किया। इस नई तकनीक के लागू होने के बाद अब वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने या गति धीमी करने की आवश्यकता नहीं होगी और टोल शुल्क स्वतः फास्टैग खाते से कट जाएगा।
यह देश में इस प्रकार की दूसरी बैरियर-लेस टोलिंग प्रणाली है। इससे पहले 2 मई को गुजरात के राष्ट्रीय राजमार्ग-48 के सूरत-भरूच खंड पर स्थित चोरायासी टोल प्लाजा पर इस तकनीक की शुरुआत की जा चुकी है। सरकार का उद्देश्य देशभर में टोल संग्रह प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत बनाना है।
उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा, अजय टम्टा, पश्चिमी दिल्ली की सांसद कमलजीत सहरावत, उत्तर पश्चिम दिल्ली के सांसद योगेंद्र चंदौलिया और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव भी उपस्थित रहे। इस दौरान एनएचएआई अधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री को नई प्रणाली की तकनीकी कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी।
नई टोलिंग प्रणाली हाई-रेजोल्यूशन कैमरे, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR), रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID), रडार, लिडार और फास्टैग आधारित डिजिटल नेटवर्क पर काम करेगी। जैसे ही कोई वाहन टोल प्लाजा से गुजरेगा, सिस्टम उसकी पहचान कर सीधे फास्टैग खाते से शुल्क काट लेगा। इसमें किसी भी तरह के फिजिकल बैरियर या मैनुअल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होगी।
एनएचएआई के अनुसार, इस नई तकनीक से टोल प्लाजा पर लंबी कतारों और ट्रैफिक जाम की समस्या में बड़ी राहत मिलेगी। वाहन बिना रुके सामान्य गति से गुजर सकेंगे, जिससे यात्रा समय कम होगा और ईंधन की भी बचत होगी। लगातार वाहन संचालन से कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की भी संभावना है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि यह प्रणाली पूरी तरह डिजिटल और रियल टाइम मॉनिटरिंग पर आधारित होगी। इससे टोल संग्रह प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और राजस्व रिसाव की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। साथ ही ट्रैफिक मूवमेंट, ऑडिट ट्रेल और डेटा एनालिटिक्स की बेहतर निगरानी भी की जा सकेगी, जिससे हाईवे प्रबंधन को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
एनएचएआई ने जानकारी दी कि पहले चरण में देश के नौ राज्यों के 17 टोल प्लाजा को इस नई एमएलएफएफ प्रणाली से जोड़ा जा रहा है। दिल्ली और गुजरात के बाद हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और असम के कई टोल प्लाजा सितंबर 2026 तक इस प्रणाली के तहत लाए जाएंगे। वहीं, दूसरे चरण में मार्च 2027 तक 108 से अधिक टोल प्लाजा को बैरियर-लेस प्रणाली से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
टोल भुगतान में लापरवाही रोकने के लिए सख्त प्रवर्तन प्रणाली भी लागू की गई है। यदि किसी वाहन का फास्टैग ब्लैकलिस्टेड, कम बैलेंस वाला या अमान्य पाया जाता है तो सिस्टम स्वतः दोगुना टोल शुल्क का ई-नोटिस जारी करेगा। बकाया भुगतान होने तक संबंधित फास्टैग निलंबित रहेगा और वह किसी भी फास्टैग आधारित सेवा में उपयोग नहीं किया जा सकेगा।
इसके अलावा, जिन वाहनों पर टोल बकाया होगा, उनके स्वामित्व हस्तांतरण के लिए एनओसी जारी नहीं की जाएगी। व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र और राष्ट्रीय परमिट नवीनीकरण को भी टोल भुगतान की स्थिति से जोड़ा गया है। सरकार का मानना है कि यह कदम देश में डिजिटल और पारदर्शी टोल प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम और प्रभावी बनाएगा।






