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MP की ‘वायरल गर्ल’ को मिली केरल हाईकोर्ट से सुरक्षा: पुलिस को लगाई फटकार; अगले हफ्ते फिर होगी सुनवाई

केरल। अलग-अलग धर्म के विवाह से जुड़े एक मामले में केरल हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (SC/ST) के अधिकार पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि बीना अनुमति के संबंधित महिला को मध्य प्रदेश पुलिस को नहीं सौपा जा सकता है। साथ ही राज्य पुलिस को महिला की सुरक्षा भी करने के निर्देश भी दिए हैं।

आयोग के अधिकार पर कोर्ट ने उठाए सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने पूछा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग किस कानूनी अधिकार के तहत केरल पुलिस को किसी महिला को दूसरे राज्य की पुलिस को सौंपने का निर्देश दे सकता है। अदालत ने आयोग के आदेशों के कानूनी आधार पर भी सवाल उठाए।

कोर्ट की अनुमति जरूरी
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि संबंधित महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध केरल से बाहर नहीं ले जाया जाएगा। अदालत ने कहा कि अंतिम फैसला आने तक उसे किसी भी एजेंसी या व्यक्ति के हवाले करने से पहले हाईकोर्ट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

पुलिस को सुरक्षा के निर्देश
अदालत ने केरल पुलिस को निर्देश दिया कि महिला जहां रह रही है, वहां उसकी सुरक्षा की जाए। उसे किसी प्रकार का खतरा महसूस हो तो पुलिस बिना देरी के सुरक्षा उपलब्ध कराए।

अलग-अलग धर्म में विवाह को लेकर विवाद
मामला एक अलग-अलग धर्म में विवाह से जुड़ा हुआ है। विवाह के बाद महिला की उम्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। शिकायत में दावा किया गया कि शादी के समय वह नाबालिग थी, जबकि महिला की ओर से अदालत में कहा गया कि विवाह के समय उसकी उम्र 18 वर्ष से अधिक थी और इससे जुड़े दस्तावेज न्यायालय के सामने रखें जा चुके हैं।

SC/ST के निर्देश पर जताई नाराजगी
केरल पुलिस ने अदालत को बताया कि (SC/ST) ने एक शिकायत के आधार पर महिला को मध्य प्रदेश पुलिस के हवाले करने के निर्देश दिए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे में घटनाक्रम की जानकारी सीधे अदालत के समक्ष रखी जानी चाहिए थी। केवल रजिस्ट्री को पत्र भेजना सही नहीं है।

आखरी सुनवाई तक सुरक्षा जारी रहेगी
महिला की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उसे अब भी जान का खतरा है और जबरन दूसरे राज्य भेजे जाने से उसकी सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। प्रारंभिक तौर पर दलीलों में हाईकोर्ट ने पुलिस सुरक्षा जारी रखने के निर्देश दिए और कहा कि मामले में अंतिम फैसला होने तक महिला को अदालत की अनुमति के बिना किसी भी व्यक्ति या एजेंसी के हवाले नहीं किया जाएगा।

अगले हफ्ते होगी फिर सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह करते हुए सभी संबंधित रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं। तब तक अंतरिम पुलिस सुरक्षा और युवती को अदालत की अनुमति के बिना किसी के हवाले नहीं करने का आदेश प्रभावी रहेगा।

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