महाकाल ने धारण किया शेषनाग मुकुट: रजत चंद्र-त्रिशूल से हुआ शृंगार; भस्म आरती में शामिल हुए हजारों भक्त

उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के कपाट परंपरागत विधि-विधान से खोले गए। सबसे पहले सभा मंडप में विराजमान वीरभद्रजी के कान में स्वस्ति वाचन किया गया।
इसके बाद घंटी बजाकर भगवान महाकाल से कपाट खोलने की अनुमति ली गई। उसके पश्चात सभा मंडप के चांदी से सजे पट खोले गए। पुजारियों ने भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन शुरू किया।
पुजारियों ने महाकाल का श्रृंगार उतारा और पंचामृत पूजन के बाद कर्पूर आरती की। इसके बाद श्रद्धालुओं ने बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए और जयकारे लगाए।
फल के रस से अभिषेक
गर्भगृह के पट खुलने के बाद पुजारियों ने भगवान महाकाल का श्रृंगार उतारा और पंचामृत पूजन के बाद कर्पूर आरती की। नंदी हॉल में नंदीजी का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। इसके बाद जल से भगवान महाकाल का अभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का पूजन किया गया।
रजत चंद्र-त्रिशूल, मुकुट और आभूषण से श्रृंगार
पंचामृत पूजन के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। उन्हें रजत चंद्र, त्रिशूल, मुकुट और विभिन्न आभूषण अर्पित किए गए। भगवान को भांग, चंदन, ड्रायफ्रूट और भस्म चढ़ाई गई। भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई। सुगंधित पुष्पों से बनी फूलों की माला से भगवान का श्रृंगार किया गया। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
भस्म आरती की परंपरा के अनुसार महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। महाकाल ने निराकार से साकार रूप में दर्शन दिए। हजारों भक्तों ने भस्म आरती में भगवान के दर्शन किए। आरती के दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा।