इंदौर में सारेगामा कंसर्ट पर खींचतान: MIC मेंबर बोले- 65 लाख बकाया; कमिश्नर का दावा- कुछ भी बकाया नहीं

आदित्य शुक्ला। इंदौर। लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में सारेगामा के दो दिवसीय कार्यक्रम को लेकर नगर निगम और आयोजकों के बीच मनोरंजन कर जमा कराने को लेकर खींचतान सामने आई। शुक्रवार को दिनभर चली बातचीत के बाद शनिवार शाम आयोजकों ने 3 लाख रुपए अग्रिम मनोरंजन कर जमा किया।
इसके बाद नगर निगम ने कार्यक्रम की अनुमति दे दी। कार्यक्रम 22 और 23 अगस्त को आयोजित किया जा रहा है। इसमें गीतकार मनोज मुंतशिर के कृष्णा नाटक का मंचन होना है।

शुक्रवार रात तक निगम करता रहा इंतजार
नगर निगम अपर आयुक्त आकाश सिंह के अनुसार, आयोजन की जानकारी मिलते ही आयोजकों को अग्रिम मनोरंजन कर जमा कराने के लिए कहा गया था। उन्हें टिकट बिक्री के अनुपात में कर जमा कराने की जानकारी दी गई थी।
शुक्रवार को निगम अधिकारियों और आयोजकों के बीच दिनभर बातचीत होती रही। आयोजक कर जमा कराने के लिए आने की बात कहते रहे। निगम अधिकारी रात करीब 10 बजे तक इंतजार करते रहे, लेकिन आयोजक नहीं पहुंचे।
इसके बाद राजस्व विभाग प्रभारी निरंजन सिंह चौहान गुड्डू ने स्पष्ट किया कि जब तक अग्रिम मनोरंजन कर जमा नहीं होगा, कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जाएगी।

शनिवार को जमा किए 3 लाख रुपए
इसके बाद शनिवार शाम आयोजकों ने 3 लाख रुपए अग्रिम मनोरंजन कर के रूप में जमा किए। राशि जमा होने के बाद निगम ने कार्यक्रम की अनुमति दे दी। इस बीच पुराने मनोरंजन कर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। निगम के राजस्व विभाग के अनुसार आयोजकों से पूर्व के कार्यक्रमों का करीब 65 लाख रुपए बकाया होने की बात कही गई थी।

पुराने बकाए पर निगम के दावों में विरोधाभास
सारेगामा के पूर्व कार्यक्रम को लेकर भी मनोरंजन कर जमा कराने का मुद्दा सामने आया था। अब पुराने बकाए को लेकर निगम के अधिकारियों के अलग-अलग दावों से मामला उलझ गया है।
राजस्व विभाग प्रभारी निरंजन सिंह चौहान गुड्डू ने बकाया राशि की बात कही है। वहीं नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल का कहना है कि आयोजकों पर कोई मनोरंजन कर बकाया नहीं है।
कमिश्नर ने कहा कि नियमानुसार जितना टैक्स बना था, वह जमा करा लिया गया है। जब उनसे राजस्व विभाग प्रभारी के बकाया राशि संबंधी बयान को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इस पर कोई जवाब नहीं दिया।
अब सवाल यह है कि यदि आयोजकों पर पूर्व का 65 लाख रुपए बकाया था, तो शनिवार को केवल 3 लाख रुपए जमा कराने के बाद कार्यक्रम की अनुमति किस आधार पर दी गई। फिलहाल निगम अधिकारियों के अलग-अलग बयानों से मामला चर्चा में है।