कोर्ट ने स्वैछिक अनुमति दी लेकिन सहमति पत्र में मना करने का विकल्प ही नहीं, अबसे बिना अनुमति के APAAR ID नहीं बना सकता स्कूल

APAAR ID को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। आदेश के अनुसार अबसे कोई भी स्कूल अपने मन से बच्चों की अपार आईडी नहीं बना पाएगा। इसके लिए उन्हें पहले माता-पिता की सहमति लेना आवश्यक होगा। ये मामला शुरू ओडिसा की हाई कोर्ट से हुआ। भुवनेश्वर के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पेरेंट्स रोहित आनंद दास से APAAR ID बनाने के लिए सहमति मांगी। सहमति पत्र में इंकार या स्वीकृति देने जैसा कोई विकल्प नहीं था। इसके खिलाफ उन्होंने ओडिशा हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से प्राइवेसी प्रभावित होने की सम्भावना
सरकार ने अपार आईडी बनाने के लिए स्वैछिक अनुमति दी है लेकिन सहमति पत्र में मना करने का विकल्प ही नहीं है। आधार और अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है। केवल बाद में सहमति वापस लेने का विकल्प पर्याप्त नहीं है। पेरेंट्स के पास पहले से मना करने का अधिकार भी होना चाहिए।
APAAR ID पूरी तरह स्वैच्छिक
केंद्र और राज्य सरकार ने अदालत में भी कहा कि APAAR ID पूरी तरह स्वैच्छिक है। पेरेंट्स चाहें तो सहमति न दें और बाद में सहमति वापस भी ले सकते हैं। APAAR ID के कई मामलों में छात्र की ऊंचाई, वजन जैसी जानकारी भी दर्ज की जा सकती है। इसी वजह से नाबालिग छात्रों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य रखी गई है। इसके साथ ही याचिका में यह भी मांग की गई थी कि अगर कोई छात्र APAAR ID नहीं बनवाता है, तो उसे एडमिशन, परीक्षा में रजिस्ट्रेशन, मार्कशीट, सर्टिफिकेट या किसी अन्य एकेडमिक सुविधा से दूर नहीं किया जाना चाहिए।
इसलिए बनाई अपार आईडी
गौरतलब है कि भारत सरकार की ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ पहल के तहत अपार आईडी (Automated Permanent Academic Account Registry) हर विद्यार्थी को दी जाने वाली 12 अंको की एक स्थाई डिजिटल स्टूडेंट आईडी है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) की अवधारणा के अनुरूप विकसित किया गया है। इस आईडी को इसलिए बनाया गया है जिससे विद्यार्थियों को अपना पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिल जाए।