खड़गे ने सरकार से पूछे तीन सवाल: बोले- जब आत्मनिर्भर भारत तो चीनी क्यों हो रही आयात; 70 रुपए तक पहुंचा दाम

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और घटते स्टॉक को लेकर केंद्र सरकार से 3 सवाल किए।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। फिर भी चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है।
यह कैसा आत्मनिर्भर भारत है, जहां एक तरफ विदेश से चीनी आयात की जा रही है। दूसरी तरफ गन्ने को एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
चीनी की कीमत 70 रुपए किलो तक पहुंची
खड़गे ने सवाल उठाया कि देश के कई शहरों में चीनी की कीमत 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। पिछले 3 महीने में इसके दाम 40%, यानी 19 रुपए प्रति किलो तक बढ़े हैं। कीमत को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट को मंजूरी दी है।
खड़गे ने सरकार से ये 3 सवाल पूछे
दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक भारत में चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया। उन्होंने सरकार से 10 लाख टन चीनी ड्यूटी फ्री आयात करने की जरूरत पड़ने पर भी सवाल उठाया। खड़गे ने एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और चीनी के इस्तेमाल पर भी सवाल किया। उन्होंने कहा कि जब देश में चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं, तब विदेश से आयात करने की स्थिति क्यों बनी।
तीन महीने में गुड़ भी 24% तक महंगा
चीनी के साथ ही अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। पिछले 3 महीने में गुड़ के दाम 24%, चावल 16% और मक्के के आटे की कीमत 11% तक बढ़ी है। चीनी की कीमत बढ़ने की एक वजह मिलों के पास उपलब्ध स्टॉक में कमी है। पिछले सीजन में पेराई शुरू होने से पहले मिलों के पास करीब 47 लाख टन चीनी का स्टॉक था। इस बार घटकर 32 लाख टन रह गया।
सरकार बोली- एथेनॉल उत्पादन कीमत बढ़ने की वजह नहीं
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को चीनी की बढ़ती कीमतों पर अपना पक्ष रखा। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि एथेनॉल उत्पादन कीमत बढ़ने की वजह नहीं है। घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम के कारण गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव होने से शक्कर महंगी हुई है।
एक्स-मिल कीमत 7 दिनों में 62 रुपए हुई
उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत 48 रुपए प्रति किलो थी, जो बढ़कर 56 रुपए प्रति किलो हो गई। वहीं, एक्स-मिल कीमत सिर्फ 7 से 10 दिनों में 47-48 रुपए से बढ़कर 62 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई। खाद्य सचिव ने मिलों की ओर से अचानक कीमतें बढ़ाने को गलत बताया।