|

झाबुआ में प्रांतीय पटवारी संघ का प्रदर्शन: फार्मर IED और जियो-टैग का विरोध तेज; शासन को दी चेतावनी

झाबुआ। प्रांतीय पटवारी संघ द्वारा मध्यप्रदेश शासन की महत्वकांक्षी योजनाओं के पटवारियों पर बढ़ रहे प्रशासनिक दबाव के विरोध में एक कड़ा रुख अपनाया गया है। संघ की ओर से जिला झाबुआ में SDM महेश मंडलोई को मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया है। पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों और समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेश के पटवारी कड़े कदम उठाने के लिए विवश होंगे।

पटवारियों को ‘निष्पादक’ बनाने पर आपत्ति
प्रांतीय पटवारी संघ ने “स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026” योजना का स्वागत करते हुए कहा है कि ग्रामीण अंचलों में इससे ऋण संबंधी सहायता मिलेगी, लेकिन इस योजना के तहत पटवारियों को ‘निष्पादक’ बनाए जाने का कड़ा विरोध किया गया है।

संघ का तर्क है कि ग्रामीण आबादी क्षेत्र की भूमि का स्वरूप कृषि भूमि से अलग है और इसका प्राथमिक सर्वेक्षण पंचायत राज व्यवस्था के अंतर्गत हुआ है। पंजीयन दस्तावेजों में पटवारी का व्यक्तिगत नाम और ई-हस्ताक्षर होने से भविष्य में सीमा, कब्जे या तकनीकी त्रुटियों के विवादों में पटवारी को व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराए जाने की संभावना है, जो कि पूरी तरह अनुचित है।

फार्मर IED निर्माण और दवाब की राजनीति पर रोक
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि पूर्व में भी पटवारियों ने सीमित समय में सबसे अधिक फार्मर आईडी बनाकर मध्यप्रदेश शासन को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। हालांकि, अब जो फार्मर आईडी शेष हैं, वे एक निरंतर चलने वाली तकनीकी प्रक्रिया है।

इसके लिए पटवारियों पर मानसिक दबाव बनाया जाना और विभागीय कार्रवाई करना अनैतिक है। संघ ने चेतावनी दी है कि जब तक इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी नहीं होते और कार्रवाई रुकती नहीं, तब तक पटवारी एक भी फार्मर आईडी नहीं बनाएंगे।

जियो-टैग गिरदावरी का विरोध और सुरक्षा का मुद्दा
जियो-टैग गिरदावरी के मुद्दे पर पटवारी संघ ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए इसे पूर्णतः अव्यवहारिक बताया है। हाल ही में इस प्रक्रिया के दौरान एक स्थानीय युवा द्वारा जान गंवाने की घटना पर संघ ने गहरी संवेदना व्यक्त की है।

संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक जियो-टैग की अनिवार्यता समाप्त नहीं होती, पटवारी गिरदावरी का कार्य नहीं करेंगे। यदि इस संबंध में कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई, तो प्रदेश के समस्त पटवारी तत्काल बस्ता रखने के लिए विवश हो जाएंगे।

लंबित वेतन विसंगति और सेवा संबंधी समस्याएं
पटवारियों ने अपनी उपेक्षित पड़ी मांगों को प्रमुखता से उठाया है। संघ का कहना है कि वे शासन की हर योजना को जमीन पर उतारने में हमेशा अग्रणी रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी वेतन विसंगति, ग्रेड-पे, कैडर रिव्यू और पदोन्नति जैसी समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं।

अन्य राज्यों जैसे हरियाणा का हवाला देते हुए पटवारियों ने मांग की है कि जब तक उनकी मूल सेवा समस्याओं का स्थायी निराकरण नहीं होता, तब तक उन पर नई योजनाओं और अतिरिक्त कार्यभार का दबाव न डाला जाए। चेतावनी: कलमबंद आंदोलन की चेतावनी

पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि ज्यादा दबाव बनाया गया, तो प्रदेश स्तर पर पटवारी कार्य का बहिष्कार किया जाएगा। जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।

Share