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झाबुआ में किसानों को मनाने जमीन पर बैठीं SDM: किसान बोले- मांगें पूरी नहीं होने तक डटे रहेंगे; यहीं बनाएंगे..यहीं खाएंगे

झाबुआ। बदनावर-टिमरवानी फोरलेन के मुआवजे को लेकर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी है। किसान गुरुवार दोपहर से झाबुआ कलेक्ट्रेट परिसर में डटे हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों के किसानों ने पहली रात खुले आसमान के नीचे धरना स्थल पर ही गुजारी।

धरना स्थल पर किसानों ने सामूहिक रूप से भोजन भी तैयार किया। कंडों पर 30 किलो आटे की बाटी और 7 किलो चावल बनाए गए। वहीं सुबह 10 लीटर दूध से चाय तैयार की गई और पोहे का नाश्ता किया गया। प्रदर्शन में महिला किसान और बच्चे भी शामिल हैं।

प्रदर्शन की तस्वीरें…

चार गुना मुआवजे की मांग
किसान बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि बदनावर-टिमरवानी फोरलेन निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहित की जा रही है। किसानों को नियमों के अनुसार उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है।

एसडीएम ने जमीन पर बैठकर बातचीत की
गुरुवार शाम एसडीएम और एनएचएआई के अधिकारी किसानों से चर्चा करने धरना स्थल पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों के बीच जमीन पर बैठकर बातचीत की और मुआवजे समेत अन्य प्रक्रियाओं की जानकारी दी। इसके बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से भी मुलाकात की।

मुआवजे को लेकर सहमति नहीं बनी
किसान संघ के जिला मंत्री वरदीचंद पाटीदार ने बताया कि मुआवजे को छोड़कर अन्य मुद्दों पर अधिकारियों का रुख सकारात्मक रहा है। हालांकि मुआवजे को लेकर सहमति नहीं बन सकी। किसानों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।

कलेक्टर के आदेश पर ही होगी कार्रवाई 
एनएचएआई प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवेंद्र चापेकर ने कहा कि हमने किसानों को समझाया है कि आपकी जो भी मांगे है उसके लिए आप कलेक्टर को आवेदन दे सकते है। अगर वो आदेश देंगे तो हम कार्रवाई करेंगे। मुआवजे का निर्धारण रजिस्ट्री के आधार पर किया गया है।

जिन भी चीजों पर कार्रवाई हो सकती है वह करें
एसडीएम मेघनगर अवंधती प्रधान ने बताया कि किसानों ने बहुत सारी बातों पर आपत्ति जताई है। अभी भूमि अधिग्रहण पूरी तरह से नहीं किया गया है। हमने उन्हें पूरी प्रक्रिया बताई है। हमारी प्राथमिकता यही है कि किसानों को पूरी प्रक्रिया बता दी जाए जिससे उन्हें हम पर भरोसा हो। हमारा प्रयास है कि जिन भी मांगों पर कार्रवाई हो सकती है वह करें। हम चाहते है कि किसान परेशान न हो और वह जल्द से जल्द प्रस्थान करें।

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