जन्माष्टमी पर MP में 111 स्थानों पर कार्यक्रम: CM निवास पर 101 बच्चे बनेंगे राधा-कृष्ण; 7500 मंदिरों में होगी विशेष सजावट

भोपाल। मध्यप्रदेश में ‘घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल’ की संकल्पना के साथ प्रदेश के 55 जिलों में 111 स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
7500 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की जाएगी। आयोजन में 1500 से अधिक स्थानीय कलाकार भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति, लोक परंपराओं और जीवन दर्शन पर आधारित प्रस्तुतियां देंगे।
नृत्य-नाटिका, रासलीला, भजन, लोकगायन और शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से कृष्ण के जीवन से जुड़े अलग-अलग प्रसंग मंच पर जीवंत किए जाएंगे। प्रदेश के 82 मंदिरों में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।
मुख्यमंत्री निवास पर होगा विशेष आयोजन
‘श्रीकृष्ण पर्व’ का विशेष आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर होगा। यहां 101 बच्चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में शामिल होंगे। जन्मोत्सव के दौरान मटकी फोड़ भी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बच्चों को माखन-मिश्री, लड्डू गोपाल की मूर्ति और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित पुस्तक भेंट करेंगे।
परशुराम-श्रीकृष्ण लोक का भूमिपूजन
इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव महू के जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्ण लोक का भूमिपूजन करेंगे। यहां भगवान परशुराम द्वारा श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किए जाने के प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिका होगी। साथ ही श्रीकृष्ण और भगवान परशुराम से जुड़े प्रसंगों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
भोपाल में एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
भोपाल के इस्कॉन पटेल नगर स्थित हरे कृष्ण लैंड में शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव होगा। आयोजकों के अनुसार, एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। भगवान श्री श्री गौर राधा वल्लभ जी का विशेष श्रृंगार और दर्शन होंगे। मंदिर को जैसलमेर की पारंपरिक थीम पर सजाया जा रहा है।
थाईलैंड से मंगाए ऑर्किड फूल
सजावट में थाईलैंड से मंगाए गए विशेष ऑर्किड फूलों का इस्तेमाल किया जाएगा। आयोजन के दौरान हरे कृष्ण महामंत्र का लगातार कीर्तन होगा। श्रीकृष्ण कथा के साथ ‘रुक्मिणी कल्याणम्’ नाट्य प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई है।
उज्जैन में पांच दिन कृष्ण कथा और रासलीला
उज्जैन के नारायणा धाम मंदिर परिसर में 2 से 6 सितंबर तक पांच दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन होगा। इसमें श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता, गुरु सांदीपनि आश्रम, माखन चोरी, जन्म एवं बाल लीला और गीता उपदेश जैसे प्रसंगों पर नृत्य-नाटिकाएं प्रस्तुत की जाएंगी। भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, भजन और रासलीला के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं दिखाई जाएंगी।
गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित कार्यक्रम
सांदीपनि आश्रम में 2 से 4 सितंबर तक गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित कार्यक्रम होंगे। यहां भगवान श्रीकृष्ण द्वारा महर्षि सांदीपनि से शिक्षा ग्रहण करने और 64 कलाओं व 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त करने के प्रसंग को नृत्य-नाटिका के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा।
पन्ना, धार और महिदपुर में भी विशेष आयोजन
पन्ना के श्री बलदेवजी मंदिर में बलदेव-श्रीकृष्ण प्रसंग पर नृत्य-नाटिका और भजन होंगे। श्री जुगल किशोर मंदिर में श्रीकृष्ण नृत्य-नाटिका, भक्ति गायन और प्रणामी परंपरा पर आधारित भरतनाट्यम प्रस्तुत किया जाएगा।धार के अमझेरा में 3 और 4 सितंबर को श्रीकृष्ण लीला तथा रुक्मिणी वरण एवं विवाह प्रसंग पर नृत्य-नाटिकाएं होंगी। महिदपुर में राधा-कृष्ण प्रेम, भक्ति गायन, बुंदेली लोकगायन और श्रीकृष्ण जन्म से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे।