इंदौर में राजकमल किताब उत्सव शुरू: गीतांजलि श्री और राधावल्लभ त्रिपाठी ने किया उद्घाटन; साहित्य, मीडिया और कला पर हुई चर्चा

इंदौर। अहिल्या केंद्रीय पुस्तकालय परिसर स्थित प्रीतमलाल दुआ सभागृह में शुक्रवार से पांच दिवसीय राजकमल किताब उत्सव शुरू हुआ। राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा आयोजित उत्सव का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखिका गीतांजलि श्री और प्रसिद्ध कवि राधावल्लभ त्रिपाठी ने किया। 4 से 8 सितंबर तक चलने वाले उत्सव में पुस्तक एवं चित्र प्रदर्शनी के साथ लेखक-पाठक संवाद, रचना पाठ, विचार-विमर्श, संगीत प्रस्तुतियां और नई पुस्तकों के लोकार्पण जैसे कार्यक्रम होंगे।
भारतीय ज्ञान परंपरा में वाद-संवाद पर व्याख्यान
पहले सत्र में राधावल्लभ त्रिपाठी ने भारतीय ज्ञान परंपरा और साहित्य में संवाद की भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में प्रश्न, उत्तर, तर्क और प्रतितर्क के माध्यम से विचारों को आगे बढ़ाने की परंपरा रही है। उन्होंने साहित्य की व्यापकता पर जोर देते हुए कहा कि साहित्य सिर्फ बड़े शहरों और प्रभावशाली लोगों तक सीमित नहीं है। गलियों, गांवों, छोटे दुकानदारों और समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों का जीवन भी साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गीतांजलि श्री ने ‘सह-सा’ पर साझा किए लेखन अनुभव
दूसरे सत्र में गीतांजलि श्री के नए उपन्यास ‘सह-सा’ पर अजय सोडानी के साथ बातचीत हुई। उन्होंने अपने लेखन अनुभव साझा करते हुए कहा कि किसी अनजानी या खाली जगह में प्रवेश करने पर वहां क्या मिलेगा, यह पहले से पता नहीं होता। इसी अनिश्चितता में डर और जिज्ञासा दोनों मौजूद रहते हैं। उन्होंने बताया कि लेखक के तौर पर वे ऐसी जगहों में छिपी कहानियों और स्मृतियों को तलाशने की कोशिश करती हैं।

‘लावारिस सामान का कमरा’ पर चर्चा
तीसरे सत्र में युवा लेखक अंबर पांडेय के कहानी संग्रह ‘लावारिस सामान का कमरा’ का आवरण लोकार्पित किया गया। लेखक ने अपनी रचनाओं और लेखन प्रक्रिया पर चर्चा की। बातचीत में दर्शन, शून्यता, आर्थिक संघर्ष और रोजमर्रा के अनुभवों को साहित्य में दर्ज करने जैसे विषय सामने आए।
‘किसका मीडिया, किसका लोकतंत्र’ पर मंथन
चौथे सत्र में मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार ने अपनी किताब ‘मीडिया का लोकतंत्र’ के संदर्भ में ‘किसका मीडिया, किसका लोकतंत्र’ विषय पर चर्चा की। प्रकाश हिंदुस्तानी के साथ बातचीत में मीडिया स्वामित्व, संपादक की भूमिका, कॉर्पोरेट प्रभाव और डिजिटल दौर की चुनौतियों पर विचार रखे गए। उन्होंने मीडिया की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक जवाबदेही को लेकर गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई।

हुसैन की कला में परंपरा और आधुनिकता का मेल
पांचवें सत्र में मशहूर चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन की कला पर चर्चा हुई। कलाकार अखिलेश ने राजेश्वर त्रिवेदी के साथ बातचीत में हुसैन की स्वतंत्र सोच और कला-दृष्टि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हुसैन ने भारतीय संस्कृति और परंपरा से प्रेरणा लेते हुए उसे अपने समय और आधुनिक दृष्टि के साथ नए रूप में प्रस्तुत किया।
निमाड़ी लोकगीतों से हुआ पहले दिन का समापन
उत्सव के पहले दिन का समापन संजा और निमाड़ी गणगौर गीतों की प्रस्तुति से हुआ। एकता कश्मीरे और साथी कलाकारों ने लोकगीत प्रस्तुत कर मालवा की लोकसंस्कृति और परंपराओं को मंच पर जीवंत किया।

शनिवार को हेरिटेज वॉक से होगी शुरुआत
उत्सव के दूसरे दिन शनिवार को सुबह 7:30 बजे ‘ईंट-ईंट इंदौर’ हेरिटेज वॉक होगी। इतिहासकार जफर अंसारी शहर की ऐतिहासिक इमारतों और वास्तुकला से जुड़ी जानकारियां साझा करेंगे। यात्रा बोलिया सरकार की छतरियों से शुरू होकर कृष्णपुरा की छतरियों, राजवाड़ा और गोपाल मंदिर होते हुए इमामबाड़े पर समाप्त होगी।
इसके बाद प्रीतमलाल दुआ सभागृह में दोपहर 2:45 बजे से विभिन्न सत्र होंगे। इनमें चिन्मय मिश्र का ‘पहनावे की विकास यात्रा’ पर व्याख्यान, नेहा दीक्षित की किताब ‘कोई एक सईदा’ पर चर्चा, पुष्पेश पंत के साथ बातचीत और हिमालय यात्री अजय सोडानी व इतिहासकार सुधीर चंद्र के सत्र शामिल हैं। दिन का समापन कविताओं की नाट्य प्रस्तुति से होगा।