इंदौर में रैम्बो सर्कस का रोमांच: मोबाइल की दुनिया से बच्चों को निकालने पहुंचे कलाकार; 25 एक्ट से मनोरंजन

इंदौर। मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में व्यस्त बच्चों को कुछ समय के लिए वास्तविक मनोरंजन से जोड़ने का मौका मिल रहा है। इंदौर के आनंद मोहन माथुर सभागार में रैम्बो सर्कस के कलाकार रोमांचक और मनोरंजक प्रस्तुतियां लेकर पहुंचे हैं। करीब डेढ़ घंटे के शो में 20 से 25 अलग-अलग एक्ट प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इनमें रोमांच, हास्य, संगीत और आधुनिक तकनीक का मेल देखने को मिल रहा है।
जगलिंग, स्वॉर्ड बैलेंसिंग, जॉकर एक्ट, लेजर डांस, एलईडी डांस और साइकलिंग दर्शकों को खास पसंद आ रहे हैं। कलाकार अपने संतुलन और फुर्ती से मुश्किल करतब दिखाते हैं। वहीं जॉकर की हास्य प्रस्तुतियां बच्चों और बड़ों को खूब गुदगुदाती हैं। रंग-बिरंगी रोशनी, संगीत और लाइव परफॉर्मेंस बच्चों के लिए खास आकर्षण बने हुए हैं।
तीन सर्कस को मिलाकर बना रैम्बो
रैम्बो सर्कस की शुरुआत 26 जनवरी 1991 को पी.टी. दिलीप ने की थी। इससे पहले वे 1989 में एरिना सर्कस से जुड़े थे। बाद में उन्होंने ग्रेट ओरिएंटल सर्कस और विक्टोरिया सर्कस का अधिग्रहण किया। इन तीनों सर्कस के संसाधनों और कलाकारों को एक साथ लाकर रैम्बो सर्कस की शुरुआत हुई।
1991 में पुणे के सरसबाग में इसका पहला शो हुआ था। उद्घाटन शो हाउसफुल रहा था। रैम्बो नाम बड़ी टीम और उसकी ताकत को ध्यान में रखकर चुना गया था। बदलते मनोरंजन के दौर के साथ सर्कस ने लगातार नए प्रयोग किए। अब दूसरी पीढ़ी के संचालक सुजीत दिलीप और सुमित दिलीप अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

देश-विदेश में बनाई पहचान
रैम्बो सर्कस ने भारत के साथ विदेशों में भी प्रस्तुतियां दी हैं। यह भारत से वर्ल्ड सर्कस फेडरेशन, मोंटे कार्लो, मोनाको का पहला सदस्य बना। 2011 में मोंटे कार्लो में वर्ल्ड सर्कस डे समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए भारतीय सर्कस के इतिहास पर डॉक्यूमेंट्री प्रस्तुत की गई। भारत में आठ वर्षों तक वर्ल्ड सर्कस डे और मुंबई के बांद्रा में चार सीजन तक इंटरनेशनल सर्कस फेस्टिवल का आयोजन भी इसकी उपलब्धियों में शामिल है।
रैम्बो सर्कस ने मुंबई के पृथ्वी थिएटर में इनडोर सर्कस शो आयोजित कर नया प्रयोग किया। इसका 235 फीट व्यास वाला कस्टम मेड बिग-टॉप टेंट भी खास पहचान है। फिल्मों, टीवी शो, विज्ञापनों और म्यूजिक एलबम की शूटिंग भी रैम्बो सर्कस में हो चुकी है। लखनऊ बाय चांस, मुझसे दोस्ती करोगे, कॉमेडी सर्कस और इंडियाज गॉट टैलेंट जैसे प्रोजेक्ट इससे जुड़े रहे हैं।

जानवरों के बाद इंसानी हुनर बना पहचान
एक दौर में रैम्बो सर्कस में बड़ी संख्या में जानवर भी हुआ करते थे। बाद में सर्कस में जानवरों के इस्तेमाल पर प्रतिबंधों के चलते इसका स्वरूप बदलना पड़ा। इसके बाद इंसानी हुनर, अंतरराष्ट्रीय कलाकारों और नई तकनीक को प्रस्तुतियों का आधार बनाया गया। विदेशी कलाकारों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कलाकारों को विदेशों में प्रशिक्षण के अवसर भी दिए गए।

कोरोना में ऑनलाइन शो से दर्शकों तक पहुंचा
कोरोना काल में सर्कस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हुई। लंबे समय तक शो बंद रहे और कलाकारों व स्टाफ के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हुआ। इस दौरान रैम्बो सर्कस ने ऑनलाइन शो का प्रयोग किया। 2020 में इसके डिजिटल शो ‘Life Is A Circus’ के 34 शो हुए। इन्हें 60 हजार से अधिक दर्शकों ने देखा।
इससे सर्कस को आर्थिक मदद भी मिली। आज करीब 70 से 80 लोगों की टीम अपनी कला से दर्शकों का मनोरंजन कर रही है। चुनौतियों के बावजूद रैम्बो सर्कस ने अपनी पहचान कायम रखी है। इंदौर में चल रहा मौजूदा शो बच्चों और परिवारों के लिए पुराने दौर के सर्कस की यादों को आधुनिक अंदाज में फिर से जीवंत कर रहा है।