पार्क में जैन संत का अंतिम संस्कार: इंदौर पुलिस नहीं दी थी अनुमति; रहवासी कर रहे विरोध

इंदौर। पब्लिक पार्क में जैन संत का अंतिम संस्कार कर दिया गया। जानकारी मिलते ही रहवासियों की भीड़ इकट्ठा हो गई। सभी ने विरोध जताया। घटना अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र के आचार्य विद्यासागर पार्क की है। यह नगर निगम के जोन क्र. 15 और वार्ड क्रमांक 72 में है।
दरअसल, मंगलवार रात जैन समाज के कुछ लोग अन्नपूर्णा थाने पहुंचे थे। उन्होंने सार्वजनिक बगीचे में जैन संत के अंतिम संस्कार की अनुमति मांगी थी।
पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक उद्यान में अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद भी बुधवार सुबह पार्क में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
चातुर्मास के लिए ठहरे थे
सुलभाधी सागर जी महाराज 80 साल के थे। वह चातुर्मास के लिए ठहरे थे। इस दौरान उनका निधन हो गया। समाज के लोग और जैन मुनियों की सहमति से अंतिम संस्कार की तैयारी की गई।
लोगों ने पार्क में बने विद्यासागरजी स्मृति टीन शेड को अंतिम संस्कार के लिए चुना। बताया जा रहा है कि संत ने त्यागी छुल्लकजी के रूप में दीक्षा ली थी।
निधन के बाद जैन समाज ने धार्मिक परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। हालांकि, सार्वजनिक पार्क में अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर स्थानीय रहवासियों ने आपत्ति जताई है।

पार्क में अंतिम संस्कार करना गलत
पार्क में अंतिम संस्कार किए जाने से कुछ रहवासी विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि बच्चे बूढ़ें सभी पार्क में टहलने व्यायाम करने जाते हैं। ऐसे में सार्वजनिक पार्क में अंतिम संस्कार नहीं किया जाना चाहिए। इधर जैन समाज के लोगों ने कहा- संत जी का निधन होने के बाद समाज और मुनिजी की सहमति से अंतिम संस्कार किया गया है।
रहवासियों के विरोध के बाद पुलिस पहुंची
बुधवार सुबह अंतिम संस्कार की जानकारी लोगों ने अन्नपूर्णा पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित किया। पूरे घटनाक्रम की जानकारी नगर निगम को दी।

पार्षद की भूमिका पर उठे सवाल
स्थानीय रहवासियों ने वार्ड पार्षद योगेश गेंदर की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। रहवासियों का कहना है कि पार्षद रोज सुबह वार्ड में घूमते हैं। इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। इधर प्रदेश प्रकाश टीम ने भी पार्षद से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

धार्मिक आस्था और सार्वजनिक स्थान को लेकर विवाद
जैन संत के निधन के बाद समाज की ओर से धार्मिक परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार किए जाने की बात कही जा रही है। दूसरी ओर रहवासी सार्वजनिक पार्क के इस्तेमाल पर सवाल उठा रहे हैं। इसी वजह से मामला दो पक्षों के बीच विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
सहायक उद्यान अधिकारी ने लिखा पत्र
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार उद्यान में अंतिम संस्कार किए जाने की सूचना निगम को नहीं दी गई थी। निगम को इसकी जानकारी बुधवार सुबह 7 बजे मिली। इसके बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सुबह 6 बजे उद्यान परिसर में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर दी गई थी।
फिलहाल नगर निगम को मामले की जानकारी दी गई है। अब देखना होगा कि सार्वजनिक पार्क में अंतिम संस्कार की अनुमति से जुड़े नियमों और मंगलवार रात पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।