इंदौर कोर्ट से मंत्री तुलसी सिलावट बरी: चुनाव प्रचार के दौरान दर्ज हुआ था केस; कोविड प्रोटोकॉल तोड़ने का है मामला

इंदौर। मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट को इंदौर जिला कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने उपचुनाव के दौरान दर्ज कोविड-19 नियमों के उल्लंघन के मामले में उन्हें बरी कर दिया है।
उन पर कोरोना महामारी के दौरान लागू प्रशासनिक निर्देशों और प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप था। मामला छह साल पुराना है। आरोप था कि चुनाव प्रचार के दौरान बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हुए थे, जिससे कोविड-19 के नियमों का उल्लंघन हुआ। इसी आधार पर पुलिस ने महामारी अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था।
चुनाव प्रचार के दौरान दर्ज हुआ था केस
उपचुनाव के समय प्रशासन ने सार्वजनिक कार्यक्रमों और भीड़ को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए थे। आरोप था कि प्रचार कार्यक्रम में तय सीमा से अधिक लोग मौजूद थे, जिसके चलते पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
गवाहों के बयान हुए पेश
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया।
अदालत को नहीं मिले पर्याप्त सबूत
सुनवाई के दौरान मंत्री तुलसी सिलावट के खिलाफ आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इसके बाद जिला अदालत ने उन्हें दोषमुक्त करते हुए बरी करने का आदेश दिया और लंबे समय से लंबित इस प्रकरण को समाप्त कर दिया।
फैसले के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज
कोर्ट के इस फैसले को मंत्री तुलसी सिलावट के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है। वहीं इंदौर सहित प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और इसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।