इंदौर के जंगलों में क्यों लग रही आग? मन्नत, परंपरा और बढ़ती गर्मी बने बड़ी वजह
गर्मी शुरू होते ही इंदौर के आसपास मानपुर रेंज के जंगलो में महू , चोरल जैसी जगह पर आग लगाने की घटना देखने को मिली है। मध्यप्रदेश के इंदौर में वन मंडल रिकॉर्ड के अनुसार इस साल फरवरी से अप्रैल के बीच जंगलों में आग की घटना काफी बढ़ती नज़र आ रहे है। इस साल 112 घटनाएं देखने को मिली है। अप्रैल से जून की बीच 60 घटनाएं हुई है। मौसम विभाग का कहना है कि वर्ष 2026 में सबसे अधिक तापमान दर्ज हुआ है। 44.3 डिग्री सेल्सियस। यह तापमान 18 मई को दर्ज किया गया था। मार्च में अधिकतम तापमान 38 डिग्री (11 मार्च) रहा और अप्रैल में 42.8 डिग्री (26 अप्रैल) रहा। यानी तापमान अधिक होने पर इन दिनों में आग लगती है। फिर भी सबसे ज्यादा मामले मार्च से अप्रैल के बीच के हैं।
मन्नत के लिए लगाई जाती है आग
आग के पीछे बड़ा कारण ग्रामीणों की मान्यता बताई जा रही है। इनका दावा है कि इन क्षेत्रों में आग की करीब 60 से 70 प्रतिशत घटनाएं मानता (मन्नत) पूरी होने के बाद आग लगाने से जुड़ी होती हैं। इसके अलावा महुआ के फूल और तेंदूपत्ता संग्रह के मौसम में भी कई जगह सूखी पत्तियों में आग लगा दी जाती है।
ग्रामीण रात के अंधेरे में पूजा होने के बाद लगाते है आग
चोरल निवासी सुमन पाल बताती हैं कि परंपरा वर्षों पुरानी है। संतान प्राप्ति, घर बनने, विवाह होने या किसी अन्य मनोकामना के पूरी होने पर लोग रात में पूजा करते हैं। फिर पहाड़ी या जंगल में आग लगाई जाती है।
बेका गांव के वन समिति सदस्य जयमल कनासे का कहना है कि चोरल, महू और आसपास के कई गांवों में लोग दो-दो और पांच-पांच वर्षों तक हर साल पहाड़ी जलाने की मन्नत मानते हैं। वन चौकीदार मित्तूलाल बताते हैं कि कई बार रंजिश या वन कर्मचारियों को परेशान करने के लिए भी लोग ऐसा करते हैं।
महुआ और तेंदूपत्ता संग्रह भी एक कारण
“महुआ के फूल, तेंदूपत्ता और धावड़ा गोंद इकट्ठा करने के लिए कुछ जगह आग लगाई जाती है। एक वनरक्षक ने बताया कि कुछ ग्रामीणों का मानना है कि जंगल में आग लगाना ‘बली’ देने का एक रूप है। इसमें आग के दौरान मरने वाले जीव-जंतु देवता को अर्पित हो जाते हैं। वहीं कुछ लोगों का विश्वास है कि आग लगने से पहाड़ी या जंगल ‘स्वस्थ’ होता है।