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इंदौर में गिलहरी करती है गणेश प्रतिमा की परिक्रमा: 2017 में सुंड में गिलहरी के बच्चों ने लिया था जन्म; पांच दिन नहीं हुआ था विसर्जन

इंदौर। कृष्णपुरा छत्री के पास बाहुबली स्वरूप में विराजित गणेशजी 2017 में विसर्जित नहीं किए जा सके। 15 फीट के गणपतिजी की मूर्ति को विसर्जन के लिए उठाने पहुंचे तो सूड में गिलहरी के बच्चे नजर आए।

गिलहरी के बच्चों की जिंदगी की खातिर बाहुबली का विसर्जन नहीं किया जा सका। तब से यह सिलसिला चला आ रही है यहां गणेश जी के साथ मूषक की बजाय ? गिलहरी विराजित की जाती है। और हर साल गिलहरी आकर गणेश जी की परिक्रमा करती है।

लकड़ी की भट्टी पर बनता है भोजन 
आयोजक दीपेश पचौरी ने बताया कि योगीबाबा बमबमनाथ सेवा समिति द्वारा कई वर्षों से गणेश मूर्ति स्थापना की जा रही है। यहां नियम से चलित भंडारा होता है। इसके लिए खाना लकड़ी की भट्टी पर बनता है। खाना आयोजक दीपेश पचोरी ने बताया कि हम लोग चल समारोह निकालते थे जिसमें काफी खर्च होता था। इस पर योगी बाबा बम बम नाथजी ने उन्हें पैसा अनदान पर खर्च करने का कहा। उसके बाद से यहां सिर्फ समय विधि विधान से आरती पूजा होती है इसके बाद 10 दिन तक भोजन प्रसादी का वितरण होता है।

गणेशोत्सव के लिए नहीं लेते चंदा 
गणेशोत्सव के लिए योगी बाबा बम बम नाथजी गणेश मंडल किसी तरह का चंदा नहीं लेते। गिलहरी वाले गणेशजी टीम में मुकेश पचोरी, दीपेश पचोरी, गोलू पचोरी, प्रिंकेश कुशवाह, महेन्द्र मावने, प्रदेश रत्नाकर, रवि खटीक, अमित नाथ, संतोष रूनीजा, रवि रत्नाकर, गौरव चौहान सहित 50 गणेश भक्त संचालन समिति में शामिल है।

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