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इंदौर बिना परमिशन चल रहा आश्रम सील: 3 बुजुर्ग अस्पताल में भर्ती; प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम का मामला

इंदौर। बाणगंगा थाना क्षेत्र स्थित प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ बर्बरता का मामला दिन-ब-दिन और गंभीर होता जा रहा है। नाबालिग द्वारा वृद्धों को डंडे से पीटने का वीडियो वायरल होने के बाद अब आश्रम के कर्मचारियों की भूमिका पर भी बेहद संगीन सवाल खड़े हो गए हैं। आश्रम से अन्य स्थानों पर शिफ्ट किए गए बुजुर्गों ने रोते-बिलखते हुए खुलासा किया है कि वहां सिर्फ नाबालिग ही नहीं, बल्कि कुछ कर्मचारी भी आए दिन उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज करते थे। फिलहाल इस मामले में घायल दो वृद्ध पुरुषों और एक महिला बुजुर्ग का एमवाय अस्पताल (MYH) में इलाज जारी है।

संचालिका की गैरमौजूदगी में कर्मचारियों का बेरहम रवैया
एमवाय अस्पताल के वार्ड में भर्ती बुजुर्गों का कहना है कि आश्रम में मारपीट और दुर्व्यवहार कोई नई घटना नहीं है, यह सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा था। भर्ती बुजुर्ग महिला गोदावरी ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि आश्रम की संचालिका का व्यवहार बुजुर्गों के प्रति ठीक था और उन्होंने कभी हाथ नहीं उठाया, लेकिन जैसे ही संचालिका आश्रम से बाहर जाती थीं, कर्मचारी अपना आपा खो बैठते थे। नहाने के दौरान जरा सी चूक होने या छोटी-छोटी बातों पर डांटने की जगह कर्मचारी सीधे हाथ चलाते थे और भद्दी-भद्दी गालियां देते थे। बुजुर्गों का कहना है कि वे डर के कारण किसी से शिकायत नहीं कर पाते थे और लंबे समय से इस तरह की मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना सहने को मजबूर थे।

महिला कर्मचारी के उकसाने पर भड़का था नाबालिग!
घटना वाले दिन का जिक्र करते हुए बुजुर्गों ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि वीडियो में दिख रहे नाबालिग बच्चे ने पहली बार हाथ में डंडा उठाया था। घटना से ठीक पहले आश्रम की ही एक महिला कर्मचारी ने उस नाबालिग बच्चे को किसी बात पर जमकर अपशब्द कहे थे। कर्मचारी की गालियों और रवैये से आक्रोशित होकर बच्चा आपे से बाहर हो गया और उसने पास पड़ा डंडा उठाकर वहां मौजूद बुजुर्गों पर हमला कर दिया। हालांकि, पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी इस दावे की सत्यता जांच रहे हैं।

अशक्त बुजुर्गों के साथ होता था भेदभाव, सीसीसीटीवी तक नहीं थे
आश्रम के अन्य अंतवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि जो वृद्ध शारीरिक रूप से बेहद कमजोर थे या जिन्हें दैनिक कार्यों और नहाने-धोने में सहायता की जरूरत होती थी, उनके साथ कर्मचारियों का व्यवहार बेहद अमानवीय रहता था। उन्हें मुख्य परिसर से अलग-थलग कर दिया जाता था, जिससे वे भारी उपेक्षा और अपमान महसूस करते थे। जांच के दौरान यह गंभीर लापरवाही भी सामने आई है कि आश्रम परिसर में सुरक्षा या गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगाया गया था, जिससे कर्मचारियों की मनमानी बेरोक-टोक चलती रही।

बिना अनुमति चल रहा आश्रम सील, 15 बुजुर्ग शिफ्ट
मामला उजागर होते ही जिला प्रशासन और पुलिस एक्शन मोड में आ गए हैं। जांच में सामने आया कि प्रेमाश्रम वृद्धाश्रम बिना किसी वैध अनुमति और पंजीयन के संचालित किया जा रहा था। इसके तुरंत बाद प्रशासनिक टीम ने आश्रम को सील कर दिया है। आश्रम में रह रहे कुल 15 बुजुर्गों को सुरक्षित निकालते हुए निराश्रित सेवाश्रम, आशा निलय और गणेश आश्रम में शिफ्ट किया गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों पर लगे मारपीट के आरोपों, आश्रम के अवैध संचालन और सुरक्षा में हुई गंभीर चूकों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी कर्मचारियों और प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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