भारतीय बाजार की सुस्ती के पीछे सिर्फ AI फैक्टर नहीं, कई बड़े कारण जिम्मेदार

हाल के महीनों में वैश्विक बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी वजह केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कंपनियों की सीमित मौजूदगी नहीं है, बल्कि कई अन्य आर्थिक और बाजार संबंधी कारण भी इसके पीछे जिम्मेदार हैं।
NIFTY 50 और अन्य प्रमुख भारतीय सूचकांक जहां स्थिर गति से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं अमेरिकी बाजारों में AI और टेक्नोलॉजी शेयरों ने रिकॉर्ड तेजी दिखाई है। विशेष रूप से अमेरिकी टेक कंपनियों में निवेशकों की भारी दिलचस्पी ने वहां के बाजार को मजबूत समर्थन दिया है।
हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय बाजार की सुस्ती का कारण केवल AI सेक्टर में सीमित प्रतिनिधित्व नहीं है। बाजार में ऊंचे वैल्यूएशन, विदेशी निवेशकों की सतर्कता, वैश्विक ब्याज दरों का दबाव और कुछ सेक्टर्स में मुनाफावसूली भी अहम वजहें हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय बाजार लंबे समय तक प्रीमियम वैल्यूएशन पर कारोबार करता रहा है। ऐसे में जब वैश्विक निवेशकों को अमेरिका और अन्य विकसित बाजारों में बेहतर अवसर दिखाई देते हैं, तो विदेशी पूंजी का प्रवाह प्रभावित होता है।
इसके अलावा बैंकिंग, आईटी और एफएमसीजी जैसे बड़े सेक्टर्स में अपेक्षाकृत धीमी आय वृद्धि ने भी बाजार की गति को सीमित किया है। वहीं स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में अधिक उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है।
Artificial Intelligence आधारित कंपनियों की वैश्विक लोकप्रियता ने अमेरिकी बाजारों को अतिरिक्त बढ़त दी है, लेकिन भारतीय बाजार की मजबूती अभी भी घरेलू खपत, इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग और विनिर्माण क्षेत्रों पर अधिक आधारित मानी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यदि भारत में AI, सेमीकंडक्टर, डिजिटल टेक्नोलॉजी और हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से विकसित होते हैं, तो भारतीय बाजार को भी वैश्विक निवेशकों से अधिक समर्थन मिल सकता है।





