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ऑटो पीएलआई योजना पर डीप-टेक स्टार्टअप इंडस्ट्री ने उठाए सवाल, फंड के कम उपयोग पर चिंता

देश की डीप-टेक और इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) स्टार्टअप कंपनियों ने ऑटो सेक्टर की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं। स्टार्टअप्स का कहना है कि बजट में पर्याप्त आवंटन के बावजूद फंड का वास्तविक उपयोग बेहद कम हुआ है, जिससे उद्योग को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिल पा रहा।

ईवी स्टार्टअप्स ने Ministry of Heavy Industries से मांग की है कि बजट में आवंटित राशि का पूरा और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पीएलआई योजना के लिए 5,939 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

🔍 केवल 10% फंड का उपयोग

स्टार्टअप कंपनियों के अनुसार, पिछले वर्ष घोषित पीएलआई स्कीम के तहत आवंटित राशि का लगभग 10 प्रतिशत ही वास्तविक रूप से वितरित किया गया। खासतौर पर एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी क्षेत्र में लक्ष्य का मात्र 2.8 प्रतिशत प्रोत्साहन ही जारी हो सका। शुरुआती आकलनों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के अंत तक कुल आवंटन का केवल 12 प्रतिशत उपयोग होने की संभावना है।

उद्योग का कहना है कि केवल बजट आवंटन बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। जब तक फंड का बड़ा हिस्सा उभरते ईवी स्टार्टअप्स तक नहीं पहुंचेगा, तब तक भारतीय कंपनियां वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति नहीं बना पाएंगी।

🚛 कमर्शियल ईवी को प्राथमिकता की मांग

Euler Motors के संस्थापक एवं सीईओ Saurav Kumar ने कहा कि कमर्शियल ईवी सेगमेंट सबसे अधिक रिटर्न देने वाला क्षेत्र है, लेकिन पीएलआई योजना में इसे पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिल रहा। उनका कहना है कि अभी भी बड़े पारंपरिक ओईएम (OEM) को प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्होंने सुझाव दिया कि पीएलआई के ढांचे में बदलाव कर टर्नओवर आधारित मानकों के बजाय वास्तविक ईवी बिक्री के आंकड़ों को आधार बनाया जाना चाहिए, जिससे रोजगार सृजन और विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा मिल सके।

🌱 भारत को ईवी हब बनाने पर जोर

वहीं River Mobility के सह-संस्थापक एवं सीईओ Arvind Mani ने कहा कि भारत के ईवी उद्योग का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि देश के भीतर स्थायी क्षमता निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को वैश्विक ईवी मैन्युफैक्चरिंग हब बनना है तो नवोन्मेषकों और डीप-टेक स्टार्टअप्स को नीति स्तर पर मजबूत समर्थन देना होगा।


🔎 मुख्य बिंदु

  • पीएलआई फंड का केवल 10% उपयोग

  • ACC बैटरी सेक्टर में 2.8% वितरण

  • स्टार्टअप्स ने पारंपरिक ओईएम को प्राथमिकता देने पर सवाल उठाए

  • कमर्शियल ईवी सेगमेंट के लिए अलग प्रोत्साहन की मांग

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