धार में महिला ने सड़क किनारे दिया बच्ची को जन्म: समय पर नहीं मिली एम्बुलेंस; निजी वाहन से ले जा रहे थे अस्पताल

धार। गर्भवती को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने से सड़क किनारे बच्ची को जन्म दे दिया। समय रहते स्थानीय महिलाओं और एक पूर्व स्वास्थ्यकर्मी ने उसे संभाला। मां और बच्ची दोनों सुरक्षित हैं। घटना रमपुरी तहसील के ग्राम भारुडपुरा उतावली की है।
संगीताबाई को गुरुवार सुबह अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन ने आपातकालीन एंबुलेंस सेवा पर संपर्क किया। वहां से जवाब मिला कि एंबुलेंस नालछा गई है। लौटने में कम से कम तीन घंटे का समय लगेगा।
परिजनों ने निजी वाहन की व्यवस्था की। महिला को गुजरी के शासकीय अस्पताल ले गए। अस्पताल से 200 मीटर दूरी संगीताबाई की प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई। उसने अस्पताल से कुछ दूर पहले ही सड़क किनारे बच्ची को जन्म दे दिया।
बीच रास्ते में ही रोकना पड़ा वाहन
स्थिति को देखते हुए परिजनों को बीच रास्ते में ही वाहन रोकना पड़ा। सड़क पर तड़पती महिला की यह स्थिति देखकर वहां मौजूद पूर्व स्वास्थ्यकर्मी निर्मला बाई और अन्य ग्रामीण महिलाएं तुरंत मदद के लिए आगे आईं। महिलाओं ने साड़ियों और कंबलों से घेराबंदी (आड़) बनाई।

स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया
सड़क किनारे ही सुरक्षित प्रसव कराया। महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। डिलीवरी के बाद दोनों को गुजरी अस्पताल पहुंचाया गया। इस मामले में गुजरी अस्पताल की डॉक्टर ज्योति चौहान का कहना है कि अस्पताल परिसर में स्टाफ पूरी तरह उपलब्ध था। महिला को एंबुलेंस या समय पर सही परिवहन न मिलने के कारण वह अस्पताल के भीतर नहीं पहुंच सकीं।

डॉक्टर ने एंबुलेंस प्रबंधन को ठहराया जिम्मेदार
डॉक्टर कीर्ति बोरासी ने इस लापरवाही के लिए पूरी तरह से एंबुलेंस प्रबंधन व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया है। काफी दिनों से उपलब्ध नहीं है। CMHO को लिखित में इसकी सूचना दी है। बच्चा गुजरी अस्पताल में भर्ती है। दोनों स्वस्थ है।

महिला से बिल्कुल चला नहीं जा रहा था
निर्मला बाई जिन्होंने महिला की डिलीवरी कारवाई उन्होंने बताया कि महिला से बिल्कुल चला नहीं जा रहा था। मैं उसे देखते ही मदद के लिए पहुँच गई। साड़ी से पर्दा करके उसकी डिलीवरी करवाई।

सरकारी गाड़ी को आने में देर थी इसलिए बस से आए
संगीत बाई ने बताया कि सरकारी गाड़ी को फोन लगाए तो उन्होंने कहा कि आने में समय लगेगा। फिर हम बस में बैठकर आ गए। मुझे बहुत जोर से दर्द हुआ और रोड पर ही डिलीवरी हो गई।

अस्पताल बंद था
संगीता बाई की जेठानी हीराबाई ने बताया संगीता बस से उतरी तभी उसे तेज दर्द शुरू हो गया। उसकी माँ अस्पताल आई थी पर वो बंद था। तब मैंने और महिलाओं को बुलाया। उसे जमीन पर लेटा दिया। सबने साड़ी से पर्दा किया और डिलीवरी करवाई।

परिवहन सेवाओं के दावों की पोल खुली
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य और आपातकालीन परिवहन सेवाओं के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। परिजनों ने जिला प्रशासन से इस व्यवस्था को जल्द से जल्द सुधारने की मांग की है ताकि भविष्य में किसी अन्य गर्भवती महिला को इस तरह की अमानवीय स्थिति का सामना न करना पड़े।