देवास के बरवई खेड़ा में टोल टैक्स को लेकर विवाद : VIP छूट का मुद्दा उठा; स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

देवास। बरवई खेड़ा टोल प्लाजा एक बार फिर विवादों में आ गया है। यहां टोल टैक्स की वसूली को लेकर स्थानीय वाहन चालकों और टोल कर्मचारियों के बीच तीखी बहस हो गई। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
बताया जा रहा है कि घटना 24 अगस्त 2026 की है। टोल प्लाजा पर वाहनों से शुल्क लेने और ऑनलाइन भुगतान को लेकर विवाद शुरू हुआ। स्थानीय वाहन चालकों ने टोल कर्मचारियों पर सख्ती से शुल्क वसूलने का आरोप लगाया।
UPI और फास्टैग को लेकर भी बहस
स्थानीय लोगों का आरोप है कि टोल प्लाजा पर टोल भुगतान को लेकर कई बार परेशानी होती है। वाहन चालकों और कर्मचारियों के बीच UPI, फास्टैग और टोल शुल्क को लेकर बहस हुई। लोगों का कहना है कि ऑनलाइन भुगतान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से विवाद की स्थिति बनती है।
विवाद के दौरान स्थानीय वाहन चालकों ने टोल कर्मचारियों से नियमों के बारे में जानकारी मांगी। इसी बीच दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो गई। मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

रसूखदारों को छूट देने का आरोप
बहस के दौरान स्थानीय लोगों ने टोल प्लाजा पर वीआईपी और राजनीतिक रसूख वाले लोगों की गाड़ियों को छूट देने का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रभावशाली लोगों की गाड़ियों से टोल नहीं लिया जाता ।
जबकि आम वाहन चालकों से पूरा शुल्क वसूला जाता है। स्थानीय लोगों ने इस कथित दोहरे रवैये पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि अगर टोल वसूली के नियम सभी के लिए हैं तो उनका पालन सभी वाहनों पर समान रूप से होना चाहिए।
स्थानीय लोगों ने की पारदर्शी व्यवस्था की मांग
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने टोल प्लाजा पर टोल वसूली की व्यवस्था को स्पष्ट और पारदर्शी बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि आसपास के गांवों और स्थानीय वाहन चालकों के लिए नियमों की जानकारी साफ तौर पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। लोगों ने टोल कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी शिकायत की है।
उनका कहना है कि छोटी-छोटी बातों पर वाहन चालकों से बहस की स्थिति नहीं बननी चाहिए। फिलहाल टोल प्लाजा पर हुए विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कर टोल वसूली के नियमों और स्थानीय लोगों को मिलने वाली सुविधाओं को स्पष्ट करने की मांग की है।