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कांग्रेस पार्टी का आरोप: वीबीएसए विधेयक संघीय ढांचे के खिलाफ, उच्च शिक्षा पर बढ़ेगा केंद्रीकरण

कांग्रेस पार्टी ने प्रस्तावित विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) विधेयक-2025 को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे संघीय ढांचे का उल्लंघन बताया है।

👤 जयराम रमेश का बयान
कांग्रेस महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने पार्टी की ओर से जारी पत्र में कहा कि इस विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर 7 गंभीर आपत्तियां हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में होने के बावजूद विधेयक तैयार करते समय राज्य सरकारों से कोई परामर्श नहीं किया गया, जो संघीय व्यवस्था के खिलाफ है।

📚 यूजीसी और एआईसीटीई पर सवाल
रमेश ने कहा कि संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) जैसी संस्थाओं में बड़ी संख्या में रिक्त पद होने का खुलासा हुआ है।

ऐसे में सरकार का नया विधेयक लाना और भी चिंताजनक है।

⚠️ केंद्रीकरण और स्वायत्तता पर असर
कांग्रेस के अनुसार, इस विधेयक में अनुदान देने वाली परिषद का प्रावधान नहीं है, जिससे वित्तीय अधिकार मंत्रालय के पास केंद्रित हो जाएंगे। इससे:

  • उच्च शिक्षा का केंद्रीकरण बढ़ेगा

  • अकादमिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी

🏛️ नौकरशाही का बढ़ेगा नियंत्रण
रमेश ने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था में UGC, AICTE और NCTE जैसी संस्थाओं का संचालन शिक्षाविदों के बजाय नौकरशाहों के हाथों में चला जाएगा।

🎓 प्रमुख संस्थानों पर असर की आशंका
उन्होंने कहा कि इस विधेयक का असर

  • IIT

  • IIM

  • NIT

  • IIIT

  • IISER

जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों पर भी पड़ सकता है, जिससे उनकी संस्थागत स्वायत्तता कमजोर हो सकती है।

📌 नीति से विरोधाभास
कांग्रेस ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य संस्थानों को अधिक स्वायत्तता देना था, जबकि यह विधेयक इसके उलट नियंत्रण को और मजबूत करता है।

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