शिकायत के बाद भी रजत पाल बने देवास BJYM जिला अध्यक्ष: चौधरी गुट को झटका; पढे़ं फैसले के तीन राजनीतिक संकेत

देवास। जिला युवा मोर्चा अध्यक्ष के चयन को लेकर भाजपा के भीतर चल रही खींचतान अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। रजत पाल को जिला अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी के अंदर अलग-अलग गुटों के प्रभाव और संगठन में पुराने कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस से भाजपा में आए मनोज चौधरी ने रजत पाल के चयन को लेकर संगठन के वरिष्ठ स्तर पर अपनी आपत्ति रखी थी। इस मामले में शिकायत और बैठकों के जरिए चयन पर पुनर्विचार की कोशिश भी की गई, लेकिन संगठन ने अंततः रजत पाल के नाम पर मुहर लगा दी। इससे चौधरी खेमे को झटका माना जा रहा है।

पुराने कार्यकर्ता को मौका, संगठन ने दिया संदेश
रजत पाल लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। उनके चयन को पार्टी के पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन ने इस फैसले के जरिए यह संकेत दिया है कि पार्टी में पदों के लिए संगठनात्मक सक्रियता और लंबे समय से जुड़ाव अभी भी महत्वपूर्ण है।

चौधरी की रणनीति पर भी चर्चा
मनोज चौधरी के भाजपा में आने के बाद देवास की राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर लगातार चर्चा रही है। अब युवा मोर्चा अध्यक्ष के चयन में उनके पसंदीदा नाम को जगह नहीं मिलने के बाद उनके संगठनात्मक प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इस पूरे मामले में पार्टी के स्तर से किसी तरह की आधिकारिक नाराजगी या विवाद की पुष्टि नहीं हुई है।
संगठन में सक्रियता को लेकर देखें दो तस्वीरें…


राजपूत समाज के समीकरणों पर नजर
रजत पाल के चयन के बाद राजपूत समाज के बीच भी राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र राजपूत और उनके परिवार से जुड़े राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस घटनाक्रम को समाज के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
हालांकि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगा कि इसका असर चुनावी राजनीति पर पड़ेगा, लेकिन 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए देवास में जातीय और संगठनात्मक समीकरणों पर पार्टी के भीतर नजर जरूर रखी जा रही है।

फिलहाल रजत पाल की नियुक्ति के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि युवा मोर्चा में नई टीम किस तरह काम करती है और इसका असर देवास भाजपा की अंदरूनी राजनीति पर कितना पड़ता है।