भस्म आरती में महाकाल ने धारण किया राम नाम का तिलक: फलों के रस से हुआ अभिषेक; साकार स्वरूप में दिए दर्शन

उज्जैन। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का मनमोहक श्रृंगार किया गया। सुबह 3 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में भगवान की प्रतिमाओं का विधिवत पूजन किया। इसके बाद बाबा महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक हुआ। फिर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक और पूजन किया गया।
राम नाम का तिलक धारण कराया
बाबा के मस्तक पर रजत चंद्र, भांग और चंदन सुशोभित किया गया। इसके साथ ही गुलाब की माला, रजत मुकुट, त्रिपुंड और राम नाम का तिलक धारण कराकर महाकाल को दिव्य और आकर्षक स्वरूप प्रदान किया गया। श्रृंगार के पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर भस्म अर्पित की गई।
बाबा का राजा स्वरूप में श्रृंगार
बाबा महाकाल को भांग, ड्रायफुट, दिव्य आभूषणों और सुगंधित पुष्पों से राजसी स्वरूप प्रदान किया गया। भस्म आरती में भगवान को चांदी का मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष और पुष्पमालाएं धारण कराई गईं। गुलाब के फूलों से सजे महाकाल को फल-मिष्ठान का भोग लगाया गया।
महा निर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्म
भस्म आरती के दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। इस अलौकिक आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को मंदिर की विशेष और प्रमुख परंपरा माना जाता है।