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फार्म गेट बदलाव के विरोध में अनाज कारोबार बंद: धार में व्यापारियों की एक दिन की हड़ताल; मनावर में मंडी शुल्क बढ़ाने का विरोध

धार। एमपी फार्म गेट ऐप में किए गए बदलाव और किसानों को कृषि उपज के भुगतान में नगद विकल्प दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर गुरुवार को अनाज, दलहन-तिलहन व्यापारी एसोसिएशन ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। धार में दिनभर अनाज की खरीद-बिक्री बंद रही। वहीं, मनावर, बाकानेर और सिंघाना की अनाज मंडियां भी मंडी शुल्क बढ़ाए जाने के विरोध में बंद रहीं।

धार में किसानों से किया संवाद, मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन
धार में हड़ताल के दौरान व्यापारियों ने किसानों से संवाद कर फार्म गेट ऐप में हुए बदलाव से सामने आ रही परेशानियों और भुगतान संबंधी दिक्कतों की जानकारी दी। एसोसिएशन अध्यक्ष रोहित झंवर ने कहा कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को सुविधा मिले और किसानों को उनकी उपज का भुगतान समय पर मिल सके।

व्यापारियों ने किसानों से हड़ताल में सहयोग की अपील की। इस दौरान मुख्यमंत्री के नाम मंडी प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें नगद भुगतान का विकल्प फिर शुरू करने सहित अन्य समस्याओं के तत्काल निराकरण की मांग की गई।

हम्माली से होटल-चाय तक कारोबार प्रभावित
अनाज मंडी में कारोबार बंद रहने का असर कृषि उपज से जुड़े अन्य कारोबार पर भी दिखाई दिया। हम्माली, परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग, किराना, होटल-चाय और नाश्ते सहित कई गतिविधियां प्रभावित रहीं। दिनभर अनाज की खरीद-बिक्री नहीं होने से कृषि उपज से जुड़ी व्यापारिक गतिविधियां भी ठप रहीं।

मनावर में मंडी शुल्क बढ़ाने के विरोध में हड़ताल
मनावर। मंडी शुल्क बढ़ाए जाने के विरोध में मनावर, बाकानेर और सिंघाना की अनाज मंडियां बंद रहीं। व्यापारियों की हड़ताल के चलते अनाज की नीलामी और खरीदी का काम नहीं हुआ। व्यापारियों ने मंडी शुल्क वापस लेने सहित अन्य मांगों को लेकर मंडी सचिव भगत सिंह डावर को मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालक, भोपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।

सोयाबीन-मक्का लेकर पहुंचे किसान, खरीदी नहीं हुई
हड़ताल के दौरान करीब 15 से 20 किसान ट्रैक्टरों में सोयाबीन और मक्का लेकर मंडी पहुंचे। व्यापारियों द्वारा खरीदी नहीं किए जाने के कारण किसानों को अपनी उपज वापस ले जाने की स्थिति बनी।

1 से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत किया शुल्क
अनाज व्यापारी संघ अध्यक्ष राकेश जैन ने बताया कि कृषि उपज पर मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत किया गया है। व्यापारियों की मांग है कि शुल्क को दोबारा 1 प्रतिशत किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि शुल्क में 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी से कृषि उपज के कारोबार की लागत बढ़ेगी।

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