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बड़वानी में किसानों 37 मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे: किया प्रदर्शन; PM-CM के नाम सौंपा ज्ञापन

बड़वानी। जिले में भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसानों ने अपनी 37 मांगों को लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर शक्ति सिंह चौहान को सौंपा।

संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भारतीय किसान संघ पूरी तरह से एक गैर-राजनीतिक और राष्ट्रवादी संगठन है, जो लगातार किसानों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पारदर्शिता और बदलाव की मांग
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मुद्दा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ा हुआ उठाया गया है। किसान संघ ने बीमा दावा राशि के भुगतान में पूर्ण पारदर्शिता लाने की जोरदार मांग की है। किसानों का कहना है कि जिले की शॉर्टफॉल रिपोर्ट, जिसमें वास्तविक उपज, थ्रेशोल्ड उपज और उपज में आई कमी का स्पष्ट जिक्र हो, उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

संगठन ने वर्तमान रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट पद्धति को पूरी तरह बंद कर, पुराने पारंपरिक तरीके यानी फसल कटाई प्रयोग के आधार पर ही बीमा आंकने की बात कही है। इसके अलावा, केला और मिर्च जैसी मुख्य फसलों को भी बीमा योजना के दायरे में शामिल करने की मांग की गई।

खरीफ सीजन में अत्यधिक बारिश, कम उपज, वायरस और विभिन्न बीमारियों के कारण फसलों को हुए नुकसान की सही भरपाई कर किसानों को बीमा का लाभ दिए जाने की पुरजोर मांग उठाई गई।

कृषि उपज मंडियों में आधुनिक व्यवस्था 
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने मंडियों से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल उठाए और सुधार की मांग की। सभी कृषि उपज मंडियों में समर्थन मूल्य पर बिक्री सुनिश्चित करने के लिए आगामी 15 सितंबर से आधुनिक मानक परीक्षण, डैमेज टेस्टिंग और ग्रेडिंग मशीनें अनिवार्य रूप से लगाने की मांग की गई।

इसके साथ ही, ट्रैक्टर-ट्रॉली की तौल केवल 10 टन वाले बड़े कांटों से किए जाने और मंडियों के सभी सीसीटीवी कैमरे 24 घंटे लगातार चालू रखने की बात कही गई। यदि कैमरे बंद पाए जाते हैं, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की जाए।

सोयाबीन के समर्थन मूल्य पर पंजीयन तुरंत शुरू करने, धान, मक्का, ज्वार और बाजरा सहित खरीफ की सभी फसलों की सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदी करने तथा प्रदेश में लंबे समय से बंद पड़ी मंडियों को फिर से सुचारू रूप से चालू करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।

खाद की कमी और अन्य कृषि से जुड़ी प्रमुख मांगें
किसानों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि पिछले दो महीनों के दौरान रासायनिक खाद को लेकर पूरे प्रदेशभर के अन्नदाताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा है, इसलिए सरकार तुरंत पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करे।

एनपीके खाद पर भी डीएपी की तर्ज पर विशेष सब्सिडी दी जाए और इसका वितरण सुगम बनाया जाए। बाजार में बिक रहे खराब गुणवत्ता वाले कृषि आदान कीटनाशक एक बड़ी समस्या बन चुके हैं। इसमें उत्पादकता दोनों बुरी तरह प्रभावित हो रहे है।

गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए। इसके अलावा, कृषि यंत्रों पर अनुदान और कोटा बढ़ाने, जंगली पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई सरकार द्वारा किए जाने, तार फेंसिंग के लिए अनुदान देने, देसी गाय के दूध पर 10 रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि देने और प्रदेश में अलग से कृषि न्यायालय की स्थापना किए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।

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