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7 साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग: मोदी से मुलाकात पर नजर; रिश्तों में सुधार के बावजूद कारोबार में बनी दूरी

नई दिल्ली/बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस हफ्ते भारत आ सकते हैं। वे करीब 7 साल बाद भारत आएंगे। उनका दौरा BRICS समिट के लिए होगा। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात अहम मानी जा रही है। दोनों नेताओं की बैठक से भारत-चीन के रिश्तों की आगे की दिशा तय हो सकती है।

हाल के वर्षों में भारत और चीन के रिश्तों में कुछ सुधार हुआ है। दोनों देशों ने सीधी उड़ानें फिर शुरू की हैं। चीनी कारोबारियों के लिए वीजा प्रक्रिया भी आसान की गई है। भारत ने चीनी निवेश से जुड़े कुछ नियमों में भी ढील दी है।

कारोबार में अब भी भरोसे की कमी
देशों के बीच कारोबारी रिश्ते पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। कई चीनी कंपनियों के निवेश अभी भी नियमों और सुरक्षा जांच के कारण अटके हुए हैं। भारत में चीनी कंपनियों के लिए जांच पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त है।

भारत ने मार्च में इलेक्ट्रॉनिक्स, कैपिटल गुड्स और सोलर सेल जैसे कुछ क्षेत्रों में चीनी निवेश के नियम आसान किए थे। इसके बाद भारतीय कंपनी Dixon Technologies और चीनी कंपनी Vivo के बीच स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली। हालांकि, BYD और Great Wall Motor जैसी बड़ी चीनी कंपनियां भारत में अपने पुराने निवेश प्लान को आगे नहीं बढ़ा पाई हैं।

वीजा और मशीनों की सप्लाई भी बनी समस्या
भारत में काम करने वाले कुछ कारोबारियों को चीन का वीजा मिलने में परेशानी की खबरें भी सामने आई हैं। इसके अलावा चीन से आने वाले कुछ जरूरी उपकरण और मशीनें भी कस्टम पर अटकी हुई हैं। इनमें सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े उपकरण शामिल हैं। कुछ बड़ी सुरंग बनाने वाली मशीनें भी एक साल से ज्यादा समय से अटकी होने की बात सामने आई है।

मोदी-शी मुलाकात से उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच अभी भी भरोसे की कमी है। हालांकि, अगर मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात सकारात्मक रहती है तो कारोबार और निवेश से जुड़ी कुछ समस्याओं को दूर करने का रास्ता खुल सकता है।

भारत और चीन के बीच 2020 के सीमा विवाद के बाद रिश्तों में काफी तनाव आया था। अब दोनों देश धीरे-धीरे रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में BRICS समिट के दौरान दोनों नेताओं की बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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