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इंदौर के छात्रों का इंटरनेशनल इनोवेशन: बेल्जियम के युवाओं संग ई-वेस्ट से बनाए प्रोटोटाइप; ई-वेस्ट का उपयोगी समाधान संभव

इंदौर। एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग और बेल्जियम के यूसी लूवेन के छात्रों ने मिलकर एक रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम किया है।

Ingenieus X SUD Programme के तहत शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य बेकार हो चुके इलेक्ट्रॉनिक सामान के हिस्सों को दोबारा उपयोग में लाना है। छात्रों ने ई-वेस्ट के अलग-अलग कंपोनेंट्स से उपयोगी इंजीनियरिंग मॉडल और प्रोटोटाइप तैयार किए।

प्रोजेक्ट में यूसी लूवेन के डॉ. जीन पियर रास्किन और एक्रोपोलिस के प्रो. हेमंत मरमट ने छात्रों का मार्गदर्शन किया। बेल्जियम और भारत के छात्र कई महीनों से ऑनलाइन माध्यम से प्रोजेक्ट की डिजाइन और तकनीकी तैयारी पर काम कर रहे थे।

बेल्जियम और इंदौर के छात्रों ने मिलकर तैयार किया प्रोटोटाइप
इसके बाद बेल्जियम के चार छात्र इंदौर पहुंचे और एक्रोपोलिस की वर्कशॉप व लैब में भारतीय छात्रों के साथ मिलकर प्रोटोटाइप तैयार किए। इस पहल को सर्कुलर इकोनॉमी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक व्यावहारिक कदम माना जा रहा है।

इंदौर की संस्कृति को जाना 
इस दौरान छात्रों के बीच तकनीकी ज्ञान के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी हुआ। बेल्जियम के छात्रों ने इंदौर की संस्कृति और यहां के आतिथ्य को करीब से जाना। एक्रोपोलिस की इंडक्शन सेरेमनी में उन्होंने पारंपरिक फ्रेंच गीत भी प्रस्तुत किया।

ई-वेस्ट का उपयोगी समाधान संभव है 
यह भारत-बेल्जियम सहयोग दिखाता है कि तकनीकी शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के जरिए ई-वेस्ट जैसी गंभीर पर्यावरणीय समस्या के लिए नए और उपयोगी समाधान तैयार किए जा सकते हैं।

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