NHAI टोल फर्जीवाड़े में 14 राज्यों में ED की कार्यवाई, MP के पूर्व विधायक संजय शर्मा के ठिकानों में छापे; फर्जी सॉफ्टवेयर से वसूली कर रहे थे

प्रवर्तन निदेशालय ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के टोल प्लाजा पर फर्जी टोल वसूली और बड़े पैमाने पर रकम की हेराफेरी के मामले में देशभर में सख्त कार्रवाई शुरू की है। ईडी के लखनऊ जोनल ऑफिस की टीमों ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 17 के तहत उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, NCR और कोलकाता सहित 14 राज्यों में एक साथ छापेमारी की है। इस जांच के तहत मध्य प्रदेश में भी कई ठिकाने प्रवर्तन निदेशालय के दायरे में आए हैं, जिससे प्रदेश भर में हड़कंप मच गया है।
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में बुधवार सुबह उस समय हलचल तेज हो गई, जब दिल्ली से ईडी की टीम पूर्व विधायक संजय शर्मा के हाईवे स्थित कार्यालय पहुंची। करीब आधा दर्जन गाड़ियों में सवार होकर पहुंची अधिकारियों की टीम ने संजय शर्मा के राजमार्ग, तेंदूखेड़ा और देवरी स्थित कार्यालयों में एक साथ दबिश दी। जांच अधिकारी कार्यालयों के भीतर दस्तावेजों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड्स को गहनता से खंगाल रहे हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई पूर्व विधायक के कारोबार से जुड़ी बताई जा रही है, हालांकि ईडी की ओर से नरसिंहपुर कार्रवाई के कारणों को लेकर अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
पूर्व विधायक संजय शर्मा की है कम्पनी
ईडी द्वारा की गई छापेमारी में नरसिंहपुर से छिंदवाड़ा नेशनल हाईवे में टोल वसूली में गड़बड़ सामने आई है। यह पूर्व विधायक संजय शर्मा की कम्पनी बताई जा रही है जिसके पास इस मार्ग की टोल वसूली का काम है। तेंदूखेड़ा से विधायक रहे संजय शर्मा के तीन ठिकानों पर ईडी की छापेमारी की सूचना अब तक सामने आई है। संजय शर्मा कांग्रेस से विधायक रहे हैं।
सॉफ्टवेयर में फर्जीवाड़ा कर टोल से वसूली गई रकम
दूसरी ओर, ईडी की इस राष्ट्रव्यापी कार्रवाई का मुख्य आधार टोल वसूली में अनधिकृत सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर फर्जी टोल रसीदें तैयार करना है। फॉरेंसिक परीक्षण और NHAI के रिकॉर्ड की जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि सॉफ्टवेयर में फर्जीवाड़ा कर टोल से वसूली गई रकम को NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम में दर्ज करने के बजाय बाहर ही डायवर्ट किया जा रहा था। इस तलाशी अभियान का मुख्य उद्देश्य फर्जीवाड़े से जुड़े डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाना, फर्जी टोल नेटवर्क के लाभार्थियों की पहचान करना और अपराध से अर्जित की गई अवैध रकम का पता लगाना है।
इन FIR के आधार पर हुई कार्रवाई
एजेंसी की यह पूरी कार्रवाई 22 जनवरी 2025 को दर्ज FIR संख्या 17 और 19 मई 2025 को दर्ज ECIR संख्या ECIR/ASZO/04/2025 के आधार पर की जा रही है। ईडी अब इस कथित फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े तमाम संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की बारीकी से पड़ताल में जुटी हुई है।