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नागदा की नई रेलवे लाइन से 300 लोगों की भूमि प्रभावित: बैठक में अंतिम रूट पर लगेगी मुहर; 55 से ज्यादा आपत्तियां

नागदा। तीसरी और चौथी रेलवे लाइन विस्तार को लेकर रेलवे द्वारा किए गए तीन अलग-अलग सर्वे ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की चिंता बढ़ा दी हैं।

हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए बायपास ट्रैक बिछाने की योजना में अब तक हुए सर्वे को लेकर भारी खींचतान चल रही है। जहां पहले सर्वे को लेकर भाजपा और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के दबाव के बाद काम ठंडे बस्ते में चला गया था।

वहीं अब रेलवे की नजर नवीन मंडी गेट के पास से हुए दूसरे सर्वे पर टिकी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, रतलाम रेल मंडल के उच्च अधिकारियों की इसी माह होने वाली बैठक में अंतिम रूट पर मुहर लग सकती है।

39 लोगों की जमीन प्रभावित
पहले सर्वे में रेलवे ने गवर्नमेंट कॉलोनी, 64 ब्लॉक, प्रकाशनगर, श्रीराम कॉलोनी और आदिनाथ कॉलोनी से होकर सर्वे किया था। इसके बाद बनबनी से उमरना तक का सर्वे शुरू हुआ, जिसमें 39 लोगों की जमीन प्रभावित हो रही थी। प्रभावितों के विरोध के बाद विधायक ने नगरपालिका परिषद में इस रूट के विरोध में प्रस्ताव पारित करवाकर डीआरएम को सौंपा। कर्नाटक के राज्यपाल डॉ. थावरचंद गेहलोत और सांसद अनिल फिरोजिया ने भी लोगों के विरोध का समर्थन किया, जिसके बाद यह सर्वे रोक दिया गया।

दूसरे सर्वे पर रेलवे की निगाहें
नवीन कृषि उपज मंडी के पास से किए गए दूसरे सर्वे में 300 लोगों की भूमि प्रभावित हो रही है, जिनमें से कई छोटे किसान (1-2 बीघा भूमि वाले) हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इस रूट पर शासकीय भूमि का रकबा अधिक है। यह मार्ग शहर की घनी आबादी से दूर है, जिससे तकनीकी और सुरक्षा की दृष्टि से हाई-स्पीड ट्रेनों के संचालन के लिए इसे सबसे उपयुक्त माना जा रहा है।

झुग्गीवासियों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
शहर के भीतर पुराने सर्वे वाले क्षेत्रों में भी हलचल तेज हो गई है। रेलवे भूमि पर बसी झुग्गी-झोपडिय़ों के रहवासियों ने भाजपा नेता रामसिंह शेखावत के नेतृत्व में एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि ट्रैक निर्माण के लिए ली जाने वाली सरकारी जमीन के बदले वहां रह रहे लोगों की जमीन को नियमित कर उन्हें पट्टे दिए जाएं। हालांकि, तकनीकी जानकारों के अनुसार शहर के अंदरूनी हिस्से से हाई-स्पीड लाइन निकालना संभव नहीं है।

55 से अधिक आपत्तियां, निराकरण आज से
भाटीसुड़ा से रोहलखुर्द बायपास रेलवे ट्रैक के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। 24 अगस्त तक प्राप्त 55 से अधिक दावा-आपत्तियों के निराकरण के लिए 2 सितंबर को रेलवे और राजस्व अधिकारियों की संयुक्त बैठक होगी। जरूरत पडऩे पर प्रशासनिक दल निरीक्षण के लिए मौके पर भी जाएगा।

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