झाबुआ बस स्टैंड के राधे शर्मा का निधन: परिजन नहीं मिले तो लोगों ने मिलकर किया अंतिम संस्कार; इंसानियत की मिसाल पेश की

झाबुआ। झाबुआ बस स्टैंड पर कई साल से रहने वाले राधे शर्मा का 27 अगस्त को निधन हो गया। राधे बस स्टैंड पर ही छोटे-मोटे काम कर अपनी आजीविका चलाते थे। उनके निधन के बाद स्थानीय लोगों और बस चालकों ने मिलकर उन्हें अंतिम विदाई दी।
मध्यप्रदेश चालक परिचालक कल्याण संघ के जिलाध्यक्ष हाजी लाला पठान ने बताया कि उनकी राधे से करीब 10 साल पहले मुलाकात हुई थी। उस समय राधे बस में क्लीनर का काम करते थे।
हादसे में कट गया था पैर
हाजी लाला ने बताया कि राजगढ़ में बस की सफाई के दौरान राधे एक वाहन की चपेट में आ गए थे। हादसे में उनका एक पैर कट गया था। इसके बाद उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। राधे को झाबुआ बस स्टैंड पर रहने की जगह मिली। इसके बाद वे वहीं रहकर छोटे-मोटे काम करने लगे। बस स्टैंड पर आने वाले चालक और परिचालक भी अपनी इच्छा से उन्हें 10-20 रुपए की मदद कर दिया करते थे।

परिजनों की तलाश की, लेकिन नहीं मिले
राधे का झाबुआ में कोई करीबी परिजन नहीं था। वे अक्सर बताते थे कि उनकी बहन और बहनोई राजस्थान के बांसवाड़ा में रहते हैं। उनकी मौत के बाद पुलिस और हाजी लाला पठान ने परिजनों को तलाशने की कोशिश की। पार्थिव शरीर को झाबुआ के सरकारी अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया। परिजनों के आने का इंतजार किया गया, लेकिन कोई नहीं पहुंचा।

लोगों ने मिलकर किया अंतिम संस्कार
शनिवार को पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर राधे का अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। झाबुआ पुलिस थाने के जांच अधिकारी एएसआई राजेंद्र राजपूत, ईश्वर भूरिया, मध्यप्रदेश चालक परिचालक कल्याण संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सैय्यद सोनू अली, जिलाध्यक्ष हाजी लाला पठान और अन्य लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
नगर पालिका के सुरेश भाई और सफाई मित्रों ने भी सहयोग किया। सभी जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद झाबुआ में लावारिस शवों के अंतिम संस्कार स्थल पर राधे शर्मा की अंतिम क्रिया की गई। राधे के अपने परिजन भले ही अंतिम समय में उनके पास नहीं थे, लेकिन बस स्टैंड से जुड़े लोगों ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। लोगों के इस प्रयास ने इंसानियत की मिसाल पेश की।