CBSE की तीन भाषा नीति पर SC की चिंता: बच्चों पर न बढ़े पढ़ाई का दबाव; शिक्षक भी पर्याप्त हों

नई दिल्ली। CBSE की कक्षा 9 में तीन भाषाएं अनिवार्य करने की नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि नीति लागू करते समय बच्चों पर पढ़ाई का अतिरिक्त दबाव नहीं बढ़ना चाहिए।
CJ सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि तीन भाषाएं सीखने में कोई परेशानी नहीं है। हालांकि, इसे लागू करने के तरीके पर विचार जरूरी है।

शिक्षकों की उपलब्धता जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अतिरिक्त भाषाएं शुरू करने वाले स्कूलों में पर्याप्त योग्य शिक्षक होने चाहिए। जरूरी संसाधन भी उपलब्ध होने चाहिए। कोर्ट ने अध्ययन के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का सुझाव दिया।
किस कक्षा से शुरू हो नीति?
कोर्ट ने पूछा कि तीन भाषा नीति किस कक्षा से शुरू होनी चाहिए। कक्षा 6, 4 या 3 से शुरुआत पर भी चर्चा हुई। कक्षा 6 से शुरुआत होने पर इस साल के विद्यार्थियों को राहत देने का सुझाव दिया गया।
कक्षा 9 में तीन भाषाएं अनिवार्य
CBSE के 15 मई के सर्कुलर के अनुसार कक्षा 9 में तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। इनमें R1, R2 और R3 शामिल हैं। कम से कम दो भाषाएं भारतीय होना जरूरी है। विदेशी भाषा तीसरी भाषा के तौर पर चुनी जा सकती है।
R3 की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी
सत्र 2026-27 में R3 की अलग किताब उपलब्ध नहीं होने तक कक्षा 6 की किताब से पढ़ाई होगी। CBSE ने कहा है कि R3 की कक्षा 10 में बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।
दूसरे बोर्डों पर भी विचार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि तीन भाषा नीति दूसरे बोर्डों में कैसे लागू होगी। कोर्ट ने क्षेत्रीय और स्थानीय भाषाओं के महत्व पर भी जोर दिया। केंद्र ने कहा कि नीति बनाने से पहले हजारों विशेषज्ञों से सुझाव लिए गए थे।
मामले की अगली सुनवाई 10 दिन बाद होगी।