मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर 100 करोड़ की संपत्ति छिपाने का आरोप, चुनाव आयोग के बाद अब हाईकोर्ट पहुंचा मामला

जबलपुर। मध्यप्रदेश शासन के वरिष्ठ मंत्री और सागर जिले की सुरखी विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक गोविंद सिंह राजपूत की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके खिलाफ मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर) में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें उन पर साल 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए चुनावी हलफनामे (शपथ पत्र) में करीब 100 करोड़ रुपए की बेनामी और वास्तविक संपत्ति छिपाने का संगीन आरोप लगाया गया है। हाईकोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच आगामी 4 अगस्त को इस पूरे मामले पर सुनवाई करने जा रही है।
चुनाव आयोग में शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होने पर पहुंचे कोर्ट
सागर जिले के रहली क्षेत्र के निवासी राजकुमार सिंह की ओर से दायर इस जनहित याचिका में कोर्ट के समक्ष कई गंभीर बिंदु रखे गए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि गोविंद सिंह राजपूत ने चुनाव आयोग को सौंपे गए अपने आधिकारिक शपथ पत्र में अपनी पूरी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया और योजनाबद्ध तरीके से करीब 100 करोड़ रुपए की संपत्ति की जानकारी को छिपाया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में 21 मार्च 2025 को भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रमाणों के साथ शिकायत दर्ज करवाई थी। हालांकि, लंबा समय बीत जाने के बाद भी जब चुनाव आयोग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या जांच आगे नहीं बढ़ाई गई, तो उन्हें न्याय की उम्मीद में हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत करेंगे पैरवी
मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता की ओर से देश के जाने-माने और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत जबलपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने पैरवी करेंगे।
4 अगस्त को होने वाली इस सुनवाई पर प्रदेश के सियासी गलियारों की निगाहें भी टिकी हुई हैं, क्योंकि राज्य सरकार के एक कद्दावर मंत्री पर 100 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति छिपाने जैसे गंभीर आरोप सीधे तौर पर जनप्रतिनिधित्व कानून के उल्लंघन से जुड़े हैं। अब देखना होगा कि 4 अगस्त को होने वाली प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत इस मामले में राज्य सरकार, चुनाव आयोग या संबंधित पक्षों को क्या नोटिस जारी करती है।